नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक सरगर्मी के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं पर प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जिसके बाद दोनों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। वहीं, इस मामले में तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके और 5 हजार के बेल बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है। अदालत ने उन्हें आगामी 6 महीने तक शांति बनाए रखने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
CJP ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसी सिलसिले में पुलिस ने CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया था।
इसके बाद 11 अक्टूबर को इन्हें दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था, जहाँ से 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहाई मिली थी। हालांकि, मंगलवार को दोबारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान इन्हें फिर से पकड़ लिया गया और रात 3 बजे एहतियातन गिरफ्तार कर बुधवार सुबह स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। CJP की लीगल टीम प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने कोर्ट में यह झूठा दावा किया कि अन्य प्रदर्शनकारियों को बुलाया गया था, जबकि ऐसा कोई सार्वजनिक बुलावा नहीं दिया गया था।
राहुल गांधी ने की निंदा, बताया ‘कायरता’
CJP नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना और तिरंगा लहराना कोई जुर्म नहीं है।
राहुल गांधी ने कहा, ‘इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है। छात्र, युवा, पत्रकार और इंडिया गठबंधन सभी अलग-अलग बैनर तले एक ही मकसद के लिए आगे बढ़ रहे हैं। लोग अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। जंतर-मंतर भारत के लोगों का है, और हम इसे वापस लेंगे।
CJP का तीखा हमला ‘अघोषित इमरजेंसी’
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर हमला बोलते हुए इसे ‘इमरजेंसी 2.0’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि सौरव और आशुतोष जानते थे कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, फिर भी वे जंतर-मंतर गए और गर्व के साथ तिरंगा फहराया।
दीपक ने कहा, “मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि यदि आप देश में इमरजेंसी लगाना चाहते हैं, तो खुलकर आधिकारिक तौर पर लगाइए। यह अघोषित इमरजेंसी क्यों चलाई जा रही है? क्या इस देश में तिरंगा फहराना इतना बड़ा अपराध हो गया है कि इसके लिए युवाओं को जेल में डाला जा रहा है? आप देशभक्ति और असहमति को अपराध नहीं ठहरा सकते।”
एक तरफ जहां विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन और छोटे राजनीतिक दल SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर हैं, वहीं CJP नेताओं की गिरफ्तारी ने इस आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है।









