रायपुर। छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को लेकर हालात अब सवालों के घेरे में हैं। एक तरफ सरकार और प्रशासन लगातार दावा कर रहे हैं कि किसी तरह की कमी नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ राजधानी रायपुर समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नजर आ रही हैं। कई जगह पंप सूख चुके हैं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में हालात ऐसे रहे कि कई फ्यूल स्टेशनों पर वाहन चालकों की लंबी लाइनें लग गईं। लोग फुल टैंक करवाने पहुंचे तो कहीं पेट्रोल खत्म होने की बात सामने आई।
हालात बिगड़ता देख रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने पेट्रोल पंप एसोसिएशन और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद प्रशासन ने दावा किया कि पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने भीड़ की वजह ‘अफवाह’ और ‘पैनिक बाइंग’ को बताया। वहीं, पेट्रोल पंपों में भीड़ देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि अफवाह का असर नहीं बल्कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई ही सुचारू रूप से नहीं होना है।
कलेक्टर गौरव सिंह ने कहा कि पहले लोग 100-200 रुपए का पेट्रोल भरवाते थे, लेकिन अब फुल टैंक करवाने पहुंच रहे हैं, जिससे अचानक दबाव बढ़ गया है। प्रशासन ने डिपो से 24 घंटे सप्लाई देने का फैसला लिया है। पहले टैंकरों की एंट्री तय समय में होती थी, लेकिन अब इसे लगातार जारी रखने की बात कही गई है।
लेकिन जमीनी तस्वीर प्रशासन के दावों से अलग दिखाई दे रही है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों और ग्रामीण इलाकों में करीब 60 फीसदी पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक कई पंप संचालकों ने तेल कंपनियों को भुगतान नहीं किया था, जिसके कारण टैंकर नहीं पहुंचे। बाद में भुगतान होने के बाद सप्लाई बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
छत्तीसगढ़ में करीब 24 सौ पेट्रोल पंप हैं। इनमें से करीब 60 फीसदी बंद रह रहे हैं। हर दिन एक डिपो से करीब 250 टैंकरों की सप्लाई होती है, लेकिन वर्तमान में ये सप्लाई भी पूरी तरह से नहीं हो पा रही है।
दूसरी तरफ लंबी-लंबी लाइन में लगे वाहन चालकों से जब पूछा गया कि आप लाइन में क्यों लगे हैं, तो उनका कहना है कि सभी पेट्रोल पंपों से सामान्य रूप से पेट्रोल नहीं मिल रहा है, इसलिए जहां मिल रहा है, वहां लाइन लगना पड़ रहा है। अगर पेट्रोल आसानी से मिलता तो लाइन लगने का शौक हमको नहीं है।
इस मामले में जानकारी यह भी सामने आ रही है कि डिपो में पर्याप्त पेट्रोल-डीजल है, लेकिन डिपो ही सही तरह से सप्लाई नहीं कर पा रहा है।
रायपुर में कलेक्टर गौरव सिंह ने 24 घंटे डिपो से टैंकर सप्लाई के निर्देश दिए हैं, ताकि हालात नियंत्रित किया जा सके।
इधर बिलासपुर कलेक्टर ने कमर्शियल उपयोग के लिए पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि सप्लाई सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में छत्तीसगढ़ पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल धगट ने कहा कि पैनिक बाइंग की वजह से पेट्रोल पंप सूख जा रहे हैं। औसतन पेट्रोल की खरीदी लोगों ने बढ़ा दी है, जिसकी वजह से लाइन लंबी हो रही है। हर पेट्रोल पंप में रोजाना की खपत से भी ज्यादा खपत हो रही है, जिसके चलते डिमांड अचानक बढ़ गया है और डिपो अपनी क्षमता के अनुरूप सप्लाई कर रहे हैं।
इन सरकारी फरमानों के बाद लोगों का सवाल है कि अगर स्थिति सामान्य है तो फिर पंप सूख क्यों रहे हैं और सड़कों पर इतनी लंबी लाइनें क्यों दिखाई दे रही हैं?
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग सहित आसपास के इलाकों में जिस तरह पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ा है, उसने सरकार के दावों और जमीनी हालात के बीच बड़ा अंतर सामने ला दिया है।
जनता के बीच अब यही चर्चा है कि अगर संकट नहीं है… तो फिर पेट्रोल पंप खाली क्यों हैं?
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