नई दिल्ली। तेजी से बढ़ती डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता के बीच देश में नगद भुगतान का चलन भी तेजी से बढ़ा है। नगद निकासी में कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य आगे हैं। यह खुलासा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की हालिया रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है।
SBI की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) यानी बाजार में मौजूद कुल नोटों का मूल्य लगभग 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 11.1% की बढ़ोतरी दर्शाता है।
हालांकि डिजिटल ट्रांजेक्शन नए-नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। जैसे जनवरी में UPI से करीब 28 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन हुए फिर भी नकदी की मांग कम नहीं हुई। रिपोर्ट में कैश-टू-जीडीपी अनुपात घटकर लगभग 11.2% रह गया है, जो बताता है कि अर्थव्यवस्था में डिजिटल पेमेंट्स का योगदान बढ़ रहा है, लेकिन कुल नकदी की मात्रा भी साथ-साथ बढ़ रही है।
क्या हैं कारण
SBI रिसर्च में बताया गया है कि छोटे व्यापारियों में डिजिटल पेमेंट से दूर होने का रुझान दिखा है। खास तौर पर जुलाई 2025 में कर्नाटक में करीब 18,000 छोटे व्यापारियों को UPI ट्रांजेक्शन के आधार पर GST नोटिस मिले थे क्योंकि उनके लेन-देन ₹40 लाख की सीमा पार कर गए थे। इससे कई व्यापारियों ने कैश पर ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया। प्रभावित जिलों में ATM से निकासी बढ़ी औसतन हर महीने अतिरिक्त 37 करोड़ रुपये तक। इस तरह का असर पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में भी देखा गया।
कम ब्याज दरें और जमा वृद्धि में कमी से लोग सतर्क होकर ज्यादा कैश रखने लगे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में खपत बढ़ने से नकदी की जरूरत बनी रही। घरों में सोना-चांदी बेचकर तरलता जुटाने से भी कैश होल्डिंग्स बढ़ीं। रिपोर्ट में मनी डिमांड मॉडल से पुष्टि हुई कि UPI बढ़ने से कैश की मांग कम होनी चाहिए थी, लेकिन ये आर्थिक कारक इसे बैलेंस कर रहे हैं।
छोटे नोटों का दबदबा
देश में अब 100, 200 और 500 रुपये के नोट ज्यादा चल रहे हैं। मार्च 2025 तक बाजार में मौजूद 500 रुपये के नोट कुल मूल्य में 86% हिस्सेदारी देखी गई। RBI ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि ATM में इन छोटे मूल्य के नोट ज्यादा उपलब्ध कराए जाएं, ताकि रोजमर्रा के लेन-देन आसान हों।











