रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल (Brijmohan Agrawal) ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है।
18 जुलाई 2026 को लिखे गए पत्र में उन्होंने पुलिस बल की कमी, कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार के ओवरलैप, संसाधनों की कमी तथा तेजी से बढ़ती राजधानी की जरूरतों का हवाला देते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
पत्र में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि रायपुर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी, त्वरित और आधुनिक बनाना था, लेकिन वर्तमान में पर्याप्त पुलिस बल, संसाधनों और स्पष्ट क्षेत्राधिकार के अभाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रायपुर नगर निगम के कई पूरी तरह शहरी क्षेत्र अब भी रायपुर ग्रामीण पुलिस के अधीन हैं। इनमें महात्मा गांधी वार्ड, मोतीलाल नेहरू वार्ड के हिस्से, अमर सिंह बस्ती, रूपेश्वरी कॉलोनी, राजधानी विहार, कमल विहार, वीर सावरकर नगर सहित कई इलाके शामिल हैं। सांसद का कहना है कि इन क्षेत्रों को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिस की सीमाओं पर कई स्थानों पर क्षेत्राधिकार का ओवरलैप है। कमल विहार के अलग-अलग सेक्टर अलग-अलग थानों के अधीन होने से कानून-व्यवस्था और विवेचना में समन्वय संबंधी कठिनाइयां पैदा होती हैं। इसी तरह स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट और सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र को लेकर भी एकीकृत पुलिस व्यवस्था की आवश्यकता बताई गई है।
सांसद ने दावा किया कि वर्तमान में कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिस में संयुक्त रूप से लगभग 660 पद रिक्त हैं। इनमें करीब 522 आरक्षक, 43 प्रधान आरक्षक, 9 सहायक उपनिरीक्षक, 82 उपनिरीक्षक और 4 सूबेदार के पद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है और इन पदों पर शीघ्र भर्ती की जानी चाहिए।
पत्र में यह भी कहा गया है कि कमिश्नरेट लागू होने के बाद राजपत्रित अधिकारियों की संख्या 19 से बढ़कर 37 हो गई, लेकिन उनके कार्यालय, स्टाफ, वाहन और अन्य आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। राजधानी की आबादी और वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि के बावजूद ट्रैफिक पुलिस बल भी मानकों के अनुरूप नहीं है।
सांसद ने सरकार से मांग की कि रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के क्षेत्राधिकार का पुनर्निर्धारण किया जाए।
इसके अलावा पूरी तरह शहरी क्षेत्रों को कमिश्नरेट में शामिल करने, कमिश्नरेट और रायपुर ग्रामीण, दोनों इकाइयों में पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और नए पदों की स्वीकृति करने, कमिश्नरेट के कार्यालय भवन, सरकारी वाहन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
बृजमोहन अग्रवाल ने पत्र के अंत में कहा है कि राजधानी रायपुर की वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।






