रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पहली बार छत्तीसगढ़ में रायपुर से पुलिस कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत की जा रही है। 23 जनवरी से यह सिस्टम रायपुर में शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि यह कैसा होगा, इसका प्रारूप अभी तक फाइनल नहीं हुआ है। 21 जनवरी को पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का प्रारूप फाइनल हो जाएगा।
21 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक होगी। उसी बैठक में प्रारूप को फाइनल रूप दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा दिल्ली प्रवास पर हैं। दोनों की इस दिल्ली प्रवास के दौरान गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात होगी। वहीं, अमित शाह से कमिश्नरेट का प्रारूप फाइनल कराया जाएगा। मंगलवार शाम दोनों रायपुर लौटेंगे और बुधवार को कैबिनेट में इस पर मूहर लगेगी।
अभी तक प्रारूप को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार रायपुर जिले को दो भाग में बांटा जाएगा। शहरी क्षेत्र जो रायपुर नगर निगम, बीरगांव नगर निगम में आता है, वह क्षेत्र पुलिस कमिश्नर के अधीन होगा। वहीं, रायपुर रूरल एक अलग पुलिस जिला बनेगा, जहां एसपी का कप्तान होगा।
इसके अलावा कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के बहुत से अधिकार मिलते हैं। लेकिन, अब तक के तय किए गए प्रारूप के तहत पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट के अधिकारों के तहत सिर्फ कानून व्यवस्था, धारा 144 लागू करने और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद बतौर मजिस्ट्रेट फैसला सुनाने का अधिकार ही दिया जा रहा है।
अब तक के प्रारूप से IPS लॉबी नाराज
रायपुर जिले को दो पुलिस जिलों में बांटने के प्रारूप से प्रदेश की आईपीएस लॉबी काफी नाराज है। इस प्रारूप को आईएएस लॉबी की तरफ से फाइनल किया है। इसे आईपीएस को आईएएस से कम पॉवरफुल रखने की सोच से ली गई तैयारी मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक डीजीपी अरुण देव गौतम ने अस्थाई डीजीपी की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही रायपुर में कमिश्नरी सिस्स्टम के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया था। इन्हीं कोशिशों की वजह से 15 अगस्त को राज्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के पुलिस लाइन से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम शुरू किए जाने का ऐलान किया था।
भाषण के दौरान मुख्यमंत्री के इस लाइन के बोले जाने पर पीछे खड़े कार्यवाहक डीजीपी अरुण देव गौतम के चेहरे में मुस्कुराहट भी देखी गई थी। इस ऐलान के बाद एक कमेटी बनाकर अलग-अलग राज्यों की कमिश्नरी सिस्टम की स्टडी की गई। एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में इस कमेटी ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर दी थी, लेकिन अब जानकारी मिल रही है कि इस रिपोर्ट के अनुसार कमिश्नरी सिस्टम का प्रारूप नहीं बनाया गया है।
आईपीएस अफसरों का कहना है कि कमिश्नर तब तक पॉवर फुल नहीं होता, जब तक उसके पास मजिस्ट्रेट के सारे अधिकार नहीं होते। अफसरों का कहना है कि पुलिस की कमजोर लीडरशिप की वजह से कमिश्नर केे प्रारूप को लेकर आईएएस लॉबी फैसला करने की तैयारी में है।
मजिस्ट्रेट के अधिकारों के तहत झुनझुना पकड़ाने की तैयारी
मजिस्ट्रेट के अधिकारों में शस्त्र लाइसेंस, पेट्रोलियम, विस्फोटक, सिनेमा हॉल और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कुछ अन्य लाइसेंस और अनुमतियां शामिल हैं। इनमें कुछ मामलों में ये शक्तियां पुलिस कमिश्नर को स्थानांतरित हो सकती हैं।
इसके अलावा विस्फोटकों के निर्माण, भंडारण और उपयोग के लिए अनुमति, सिनेमा हॉल खोलने और संचालन के लाइसेंस, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा होने पर निरोधात्मक हिरासत यानी कि एनएसए की कार्रवाई, सार्वजनिक सभाओं पर रोक और सरकार विरोधी गतिविधियों पर रोक, पशु अत्याचार से संबंधित मामलों में तलाशी और कार्रवाई का अधिकार भी होता है।
इनमें शस्त्र लाइसेंस, सिनेमा हॉल खोलने और संचालन के लाइसेंस, एनएसए की कार्रवाई, पशु अत्याचार से संबंधित मामले और सरकार विरोधी गतिविधियों पर रोक का अधिकार पुलिस कमिश्नर को हस्तांतरित होते हैं। लेकिन, रायपुर में इनमें से कई अधिकार कलेक्टर के पास ही रखे जा रहे हैं, जिसकी वजह से अभी भी प्रारूप को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है।
रूरल एसपी का फॉर्मूला कई जगहों पर हो चुका है फ्लॉप
छत्तीसगढ़ की राजधानी में कमिश्नरी लागू करने के बाद रायपुर के ग्रामीण क्षेत्र में जिस रूरल एसपी को तैनात किए जाने की तैयारी चल रही है, वह फॉर्मूला कई राज्यों में फ्लॉप हो चुका है।
उत्तरप्रदेश में कानपुर और बनारस में यह फॉर्मूला लागू किया गया था, लेकिन बाद में पूरे जिले को कमिश्नरी घोषित की गई। इसी तरह प्रयागराज में भी पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू है।
अब तक की जो तैयारी है, उसमें नवा रायपुर, आरंग, अभनपुर और धरसींवा क्षेत्र को ग्रामीण क्षेत्र में रखा जाएगा और एक छोटा पुलिस जिला बनाकर यहां एसपी को कप्तान बनाया जाएगा। हालांकि पुलिस महकमा इसका विरोध कर रहा है।
अफसरों का कहना है कि पहले ही रायपुर को कई जिलों में बांटा जा चुका है। रायपुर जिले की वर्तमान सीमा भी इतनी बड़ी नहीं है कि इसे दो कमिश्नरेट और पुलिस जिला में बांटा जा सके।









