बालाघाट । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को मध्य प्रदेश के(Balaghat) बालाघाट जिले पहुंचे। उन्होंने जगला गांव में कुपोषण और बीमारी से मृत आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात की और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सरकार को घेरा।
राहुल गांधी पहले बिरसा विकासखंड के माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल में बच्चों से मिले। करीब 15 मिनट तक उन्होंने बच्चों से पढ़ाई और मिड डे मील की जानकारी ली। इसके बाद वह जगला गांव पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता जमा थे।
परिवारों से मुलाकात
जगला गांव में बीमारी के कारण कई बच्चों की मौत हो चुकी है। राहुल गांधी ने मृत बच्चों के स्वजनों से बात की और उनकी समस्याएं सुनीं। आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने उन्हें बैगा अंचल की स्थिति से अवगत कराया।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि कुपोषण और मलेरिया जैसी बीमारियों से आदिवासी बच्चों की मौत हुई, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत गंभीर है। उन्होंने वादा किया कि इस मामले को लोकसभा में उठाएंगे।
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्याप्त काम न होने का आरोप लगाया। कांग्रेस की सरकार आने पर इन क्षेत्रों में सुधार का वादा भी किया। मनरेगा, पूरक पोषण आहार और लाड़ली बहना योजना को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी को देखने के लिए बड़ी भीड़ जुटी। पुलिस ने रस्सी लगाकर सुरक्षा घेरा बनाया। कांग्रेस विधायकों और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कई नेताओं को भी सुरक्षा घेरे से दूर रखा गया।
राहुल गांधी ने बालाघाट में बोला
यहाँ पे बहुत सारे बच्चों की मृत्यु हुई है। बीमारी के कारण, माल न्यूट्रिशन, कुपोषण के कारण और जो सपोर्ट सरकार को देनी चाहिए, चाहे वो स्वास्थ्य की हो, शिक्षा की हो, रोजगार की हो, यहां सारा का सारा बंद पड़ा हुआ है। ऐसा लग रहा है कि हिंदुस्तान के बीच में इनको छोड़ दिया गया है और यहां पे हिंदुस्तान की सरकार मध्य प्रदेश की सरकार है ही नहीं।
इनकी जमीन का मुद्दा है। मनरेगा का मुद्दा है। फॉरेस्ट राइट एक्ट का मुद्दा है। इनके पट्टा का मुद्दा है। यहां पे कोई सपोर्ट नहीं दी जा रही। बहुत बच्चे मरे हैं। मुआवजा तक इनको मिला नहीं। आधे लोगों को नहीं। अभी तक नहीं नहीं मिला है। नहीं।
तो मैं सरकार को कहना चाहता हूं अपनी जिम्मेदारी पूरी करें। कम से कम जो फॉरेस्ट राइट एक्ट है जो इनका पट्टा है इनको मिलना चाहिए इनको दीजिए। मनरेगा का आपने नाम बदल दिया उसको चालू तो कीजिए और यहां पे अस्पताल और जो स्कूल इन लोगों को मिलना चाहिए उसको दीजिए। ये आप पता नहीं कौन सी दुनिया में हो आप। 24 घंटा विकास की बात करते हो 24 घंटा भ्रष्टाचार होता है। मगर जब हमारे आदिवासी भाइयों को जरूरत है आप गायब हो गए।
तो मैं विपक्ष की तरफ से कांग्रेस पार्टी की ओर से यह मैसेज देना चाहता हूं कि आप अपना काम कीजिए। यहां पे शिक्षा की फैसिलिटी दीजिए। यहां पे अस्पताल दीजिए और इन लोगों को जो इनका हक है यह दीजिए। अच्छा एक और बात कि अगर इनको एक योजना में पैसा मिलता है तो फिर लाडली बहना योजना में इनका पैसा कट जाता है। तो इनका हक है। अगर आपने योजना चलाई है और आप दो योजनाएं चला रहे हो तो दोनों योजना का फायदा इनको मिलना चाहिए।
तो यह मैं कहना चाहता था काफी दुख हुआ यहां आकर और जो यहां की सिचुएशन है उसे देखकर और हमने तो इनसे कहा है कि जैसे ही हमारी सरकार आएगी हम इनकी मदद करेंगे। हम फॉरेस्ट राइट बिल लाए थे। हम इनकी शिक्षा में बिलीव करते हैं। हम इन्हें वनवासी नहीं कहते हैं। हम इन्हें आदिवासी कहते हैं। आदिवासी कौन जो हिंदुस्तान का पहला मालिक था और इसीलिए इनको हिंदुस्तान में जगह मिलनी चाहिए, शिक्षा मिलनी चाहिए, स्वास्थ्य मिलना चाहिए और रोजगार मिलना चाहिए।
सर, पहले छिंदवाड़ा में देखा कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई। फिर भागीरथ पुरा इंदौर में और अब नहीं यह मध्यप्रदेश में पूरा गवर्नमेंट फेलियर है। जहां भी आप जाएं यह आपको दिखता है। टोटल 100% सरकारी फेलियर है।
पत्रकार: सर इसका मुद्दा लोकसभा में उठेगा?
राहुल गांधी: लोकसभा में उठेगा।
राहुल गांधी: लोकसभा में मुद्दा उठेगा। लोकसभा में लोकसभा में मैं यह मुद्दा उठाऊंगा सिर्फ इनका नहीं मगर देश के सारे के सारे आदिवासियों के साथ यह जो किया जा रहा है वो मैं लोकसभा में उठाऊंगा।
बालाघाट के बैगा क्षेत्रों में मलेरिया, खसरा और कुपोषण से बच्चों की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक 30 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। राहुल गांधी के दौरे से यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया है।








