छत्तीसगढ़ के नर्सों को युद्धग्रस्त इजरायल में ‘होम केयर गिवर’ भेजने पर उठे सवाल, राज्यपाल ने लिया संज्ञान

रायपुर। भारत सरकार द्वारा युद्धग्रस्त इजरायल में हजारों भारतीय कामगार (Indian Nurse) भेजने के फैसले पर अपडेट आया है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ने प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता के विरोध पत्र को संज्ञान में लिया है।

दरअसल, इजरायल में फरवरी 2026 से ईरान-इजरायल युद्ध जारी है। इसके बावजूद भारत और इजरायल के बीच अगले 5 वर्षों में 50,000 से 1 लाख अतिरिक्त भारतीय कामगार भेजने का समझौता हुआ है।

अभी भी इजरायल में 20,000 से ज्यादा भारतीय निर्माण, होटल और केयर गिविंग सेक्टर में काम कर रहे हैं। इन्हें ₹2 लाख तक वेतन, फ्री आवास-भोजन और मेडिकल इंश्योरेंस का पैकेज दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार और छत्तीसगढ़ में इसकी भर्ती चल रही है लेकिन सबसे बड़ा विवाद छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ।

11 जून 2026 को छत्तीसगढ़ नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने सभी नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर नर्सिंग की पढ़ाई कर चुकी युवतियों से इजरायल में ‘होम बेस्ड केयर गिवर’ (Indian Nurse) के 3,500 पदों पर आवेदन मांगे। काउंसिल की रजिस्ट्रार लक्ष्मी साहू ने द लेंस को बताया कि यह छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर जारी आधिकारिक विज्ञापन है।

विवाद की 3 बड़ी वजहें

नर्सिंग vs घरेलू काम: विज्ञापन में जीएनएम, बीएससी नर्सिंग डिग्रीधारियों से बीमार-बुजुर्गों की देखभाल के साथ भोजन बनाना, घर की साफ-सफाई, कपड़े धोना और ‘नियोक्ता द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य ‘भी करवाने की बात कही गई है। सवाल उठ रहा है कि पेशेवर नर्सों से घरेलू सहायक का काम क्यों?

सुरक्षा का सवाल: इजरायल को लंबे समय से वॉर जोन घोषित किया गया है। जब पूरा विश्व युद्ध क्षेत्र से अपने नागरिकों को वापस ला रहा है, तब भारत सरकार युवाओं को वहां भेज रही है। अभ्यर्थियों की सुरक्षा, बीमा, कानूनी संरक्षण और आपातकालीन सहायता को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

भारत की विदेश नीति पर सवाल: आलोचकों का कहना है कि फिलिस्तीन के अधिकारों की वकालत करने वाली भारत की पुरानी नीति को दरकिनार कर, एक ऐसे देश को मदद की जा रही है जिसे दुनिया युद्ध अपराधी के रूप में देख रही है।

राज्यपाल ने लिया संज्ञान, कांग्रेस का विरोध

इस विज्ञापन के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने राज्यपाल को पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं जताईं।

उन्होंने पत्र में कहा कि ‘नर्सिंग एक सम्मानजनक, रेगुलेटेड और जीवन बचाने वाला पेशा है। उसे घरेलू देखभाल जैसे कम स्किल्ड काम में बदलकर पेशेवर नर्सिंग की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है। क्या विदेशी मुद्रा कमाने के लिए नर्सिंग की पढ़ी बेटियों को युद्ध के मैदान में भेजना उचित है?’

मामला राजभवन पहुंचते ही गरमाया। राज्यपाल सचिवालय ने इस शिकायत को तुरंत लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेज दिया। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा को सख्त निर्देश जारी करते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

दरअसल यह भर्ती भारत सरकार और इजराइल सरकार के बीच हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत चलाई जा रही थी। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने सभी राज्यों से 3500 होम-केयरगिवर्स भेजने को कहा था। इसी के चलते छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने नर्सिंग कॉलेजों से इच्छुक उम्मीदवारों की सूची मांगी थी।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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