रायपुर। छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन (Pension) व ग्रेच्युटी बंद करने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की छत्तीसगढ़ इकाई ने राज्य सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर उच्च शिक्षा विभाग का आदेश वापस लेने और कर्मचारियों को पहले की तरह पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग की है।
उच्च शिक्षा विभाग के 1 सितंबर के आदेश पर जताई आपत्ति
वीरेंद्र नामदेव ने अपने पत्र में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी आदेश का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इस आदेश के जरिए प्रदेश के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पहले से मिल रही पेंशन और ग्रेच्युटी की सुविधा प्रभावित की गई है। महासंघ ने इस फैसले को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि वर्षों तक महाविद्यालयों में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन आर्थिक सहारा होती है।
जुलाई से रुकी पेंशन का भुगतान करने की मांग
महासंघ ने मुख्यमंत्री से जुलाई 2026 से रोकी गई पेंशन का भुगतान तत्काल शुरू कराने की मांग की है। इसके साथ ही अब तक की लंबित पेंशन राशि का एरियर एकमुश्त या निर्धारित समय-सीमा के भीतर देने का आग्रह किया है। महासंघ का कहना है कि पेंशन बंद होने से सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आदेश निरस्त कर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की अपील
वीरेंद्र नामदेव ने मुख्यमंत्री से उच्च शिक्षा विभाग के आदेश को निरस्त करने या उसमें आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अनुदानित महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को पहले की तरह पेंशन और ग्रेच्युटी मिलती रहनी चाहिए।
महासंघ ने उच्च शिक्षा और वित्त विभाग को भी इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। पत्र की प्रतिलिपि उच्च शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और उच्च शिक्षा संचालनालय के संचालक को भी भेजी गई है। महासंघ ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों की परिस्थितियों को देखते हुए जल्द फैसला लेगी।









