रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन की शाम। बूंदाबांदी के बीच मेला ग्राउंड की भीड़ को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित कर रहे थे।अमित शाह नक्सलवाद के सफाये का मुद्दा छेड़ेंगे यह तो स्वाभाविक था।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इसके लिए अमित शाह की सराहना करेंगे,उन्हें इसका श्रेय देंगे यह भी तय था,लेकिन प्रेक्षकों का ध्यान अमित शाह की किसी और बात पर जा टिका।
अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,उपमुख्यमंत्री क्रमशः अरुण साव और विजय शर्मा की जम कर तारीफ ही नहीं की भीड़ से तालियां भी बजवाई।
यह भी स्वाभाविक ही था।
भाजपा (BJP)के केंद्र सरकार के ताकतवर नेता अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार के मुखिया और दोनों उप मुखियाओं की तारीफ ही करेंगे।
लेकिन छत्तीसगढ़ में यह तारीफ और इसके लिए बजी तालियां एक नई कहानी कह रहे थे। एक ऐसी कहानी जिसमें मुख्यमंत्री के हिस्से हफ्ते भर पहले संगठन से आए तनाव के बाद राहत आई।
हफ्ते भर पहले जब छत्तीसगढ़ की प्रभारी राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी दो दिनों के राज्य के दौरे पर थीं पूरी भाजपा सकते में थीं।
पूरे होम वर्क से लैस स्मृति ईरानी हाथ में फाइल लिए पूरी सरकार की क्लास लगा गईं।
वो सत्ता के एक–एक व्यक्ति का हिसाब ले कर आईं थीं और हर एक को आईना दिखा गईं।
पूरी सरकार को बता गईं कि संगठन और सरकार में दूरियां हैं, सांसदों,विधायकों से लेकर जिलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता तक नाराज़ हैं,उपेक्षा की शिकायतें कर रहे हैं।बता रहे हैं कि उनके और मुख्यमंत्री निवास तथा कार्यालय के बीच का फासला कितना बढ़ गया है!
एक पूर्व विधायक ने यहां तक कह दिया कि डॉ.रमन सिंह के कार्यकाल में वे सीधे मुख्यमंत्री निवास चले जाया करते थे पर आज तो स्थिति उल्टी है।
सरकार में पद प्राप्त एक महिला नेत्री जब स्मृति ईरानी को 2 सौ रुपये का एक सिक्का जारी होने की अपनी उपलब्धि गिना रही थी तो स्मृति ने सिर्फ इतना पूछ लिया कि आडवाणी जी(लाल कृष्ण आडवाणी) को सिक्का भेंट किया आपने ?बताते हैं कि सिंधी समाज से जुड़ी उस पदाधिकारी की हवाइयां उड़ गईं थीं!
यही हाल सहकारिता से जुड़े एक नेता का था जब प्रभारी ने उनसे कुछ पूछ लिया था।
ऐसे किस्सों की भरमार है और प्रेस में तरह–तरह से इनकी खबरें खूब छपी हैं,चैनल्स पर दिखाई गईं हैं।
दो दिन ऐसा लगा कि स्मृति ईरानी बस एक अभियान के तहत आई हैं – सरकार और संगठन को कसना है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि बहुत दिनों बाद कोई प्रभारी इतने होम वर्क के साथ राज्य में आया था–हर एक फाइल या जानकारियां ले कर।
स्मृति ईरानी के गुस्से से शायद ही कोई बचा होगा।
लेकिन सरकार को हिला देना वाला सबसे बड़ा किस्सा तो अब सामने आया है।
भाजपा के एक आला नेता ने नाम ना देने की शर्त पर जो बताया वो सरकार को हिला देने के लिए काफी था।
इस नेता के मुताबिक एक कमरे में सिर्फ चार या पांच लोग थे।इनमें एक थीं स्मृति ईरानी।
सरकार के कामकाज को लेकर अपनी अप्रसन्नता जाहिर करते–करते वो कह गईं – मुझे मैनेज करने की कोशिश मत करिएगा!
बताते हैं कि उस वक्त उस कमरे में सन्नाटा छा गया था!
मैनेज करने की कोशिश…ये शब्द जैसे–जैसे नीचे तक पहुंच रहे हैं इनके बड़े अर्थ भी निकाले जा रहे हैं।
क्या कोई किसी को मैनेज करने की कोशिश कर रहा है?क्यों ?
इस वाक्य को सरकार के परफॉर्मेंस से दिल्ली की अप्रसन्नता के रूप में ही देखा जा रहा है।
सवाल हो रहा है कि यदि छत्तीसगढ़ में सुनी जा रही यह बात सही है कि स्मृति ईरानी ने बंद कमरे की एक बैठक में सरकार से जुड़े लोगों से कहा कि मैनेज करने की कोशिश मत करना,तो यह अत्यंत गंभीर टिप्पणी है।
इस कथित टिप्पणी के बारे में बताने वाले नेता ने अपना नाम न देने की शर्त रखी और कहा कि वे खुद उस कमरे में नहीं थे लेकिन उनकी सूचना विश्वसनीय है।
यह ऐसी टिप्पणी थी जिसकी ऑन रिकॉर्ड पुष्टि हो भी नहीं सकती।
स्मृति ईरानी के दो दिनों के दौरे के बाद जब पूरे छत्तीसगढ़ में भाजपा और सरकार उनके गर्म तेवर देख कर सकते में थीं तब 3 नवंबर मंगलवार की शाम रायपुर में राज्योत्सव के मंच से सरकार के चेहरे पर अमित शाह से राहत की फुहारें हासिल हुईं।
अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दोनों मुख्यमंत्रियों का नाम ले कर कहा कि छत्तीसगढ़ में मोदी की गारंटी 70 फीसदी पूरी हो गई है।फिर उन्होंने भीड़ से इस बात के लिए तालियां भी बजवाई!
पार्टी सूत्रों ने कहा कि हफ्ते भर के तनाव के बाद यह मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों के लिए राहत की फुहारों सा था।
लेकिन सवाल तो अब भी हैं।
सवाल यह है कि स्मृति ईरानी के तीखे तेवर छत्तीसगढ़ में पार्टी और सरकार के लिए क्या संदेश थे?
सवाल है कि स्मृति ईरानी के लौटने के हफ्ते भर बाद ही रायपुर पहुंचे अमित शाह ने राज्य सरकार के परफॉर्मेंस को ले कर जो तालियां बजवाईं उसकी गूंज क्या दिल्ली में स्मृति ईरानी तक पहुंचनी थीं ?
सही क्या है? स्मृति ईरानी की सरकार के परफॉर्मेंस को लेकर नाराजगी या अमित शाह की सरकार के कामकाज की तारीफ?
बीजेपी कार्यकर्त स्मृति ईरानी के फीडबैक को गंभीरता से लें या अमित शाह के इस संदेश को कि चिंता मत करो, सब बढ़िया है ?
एक काल्पनिक सवाल भी हवा में तैर रहा है और वो यह है कि कहीं दिल्ली के मतभेद इस राज्य में तो प्रतिबिंबित नहीं हुए ?
आपको क्या लगता है?
क्या साय सरकार को अपनी परफॉर्मेंस में सुधार करना चाहिए या अमित शाह की तारीफ के बाद निश्चिंत हो जाना चाहिए ?
कमेंट में अपनी राय दें। शायद सरकार आपकी राय पढ़ ले,सुन ले !









