डॉक्यूमेंट्री Discovery of Vishnu का प्रीमियर, मल्हार की ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल

Discovery of Vishnu

रायपुर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘Discovery of Vishnu – विष्णु : एक तलाश, एक यात्रा‘ डॉक्यूमेंट्री का प्रीमियर रविवार शाम रायपुर के शांति नगर स्थित विमतारा ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति से जुड़े लोगों की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली।

यह डॉक्यूमेंट्री बिलासपुर जिले के मल्हार में सुरक्षित भगवान विष्णु की पहली पत्थर की प्रतिमा की ऐतिहासिक खोज पर आधारित है। फिल्म में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया कि इतनी महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर होने के बावजूद यह प्रतिमा आज भी राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित पहचान और सम्मान से वंचित है।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद फिल्म की अवधारणा और उद्देश्य पर जानकारी दी गई तथा डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। फिल्म के जरिए दर्शकों ने इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की एक विशेष यात्रा का अनुभव किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद रहे, जबकि पूर्व राज्यपाल रमेश बैस विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

डॉ. रमन सिंह ने कहा, ‘यह बहुत अच्छी पहल है। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं।’

पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने कहा, ‘इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति से जुड़ी नई जानकारी मिली। यह बेहद सराहनीय प्रयास है।’

इसके अलावा विधायक सुनील सोनी, पूर्व विधायक राजकमल सिंघानिया, डॉ. संदीप दवे, डॉ. सलीम राज समेत शहर की कई जानी-मानी हस्तियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

फिल्म के निर्माता और प्रस्तोता डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि यह केवल एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि मल्हार की इस ऐतिहासिक खोज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना ही इस प्रस्तुति का प्रमुख उद्देश्य रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने फिल्म की विषयवस्तु, प्रस्तुति और सांस्कृतिक महत्व की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि यह प्रयास छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर को देशभर में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन के बाद इतिहास और संस्कृति से जुड़े लोगों के बीच मल्हार की पुरातात्विक विरासत को लेकर नई चर्चा भी शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के प्रयास लगातार होते रहे, तो छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहरें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान हासिल कर सकती हैं।

यह भी पढ़ें: ‘जल-जंगल-जमीन हमारा हक’… हसदेव अरण्य की कटाई पर गरजे टीएस सिंहदेव, सरकार पर साधा निशाना

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now