रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में वेतन विसंगति, पदोन्नति और डिजिटल क्रॉप सर्वे से जुड़ी समस्याओं को लेकर पटवारी मंगलवार, 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। प्रदेश के सभी जिलों में पटवारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। हड़ताल ऐसे समय में शुरू हुई है, जब राज्य सरकार नवंबर से होने वाली धान खरीदी की तैयारियों में जुटी है। पटवारियों के काम बंद करने से फसल सर्वे और राजस्व से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका है।
पीवी ऐप से सर्वे करने का विरोध
पटवारियों की प्रमुख मांगों में पीवी (फिजिकल वेरिफिकेशन) ऐप के जरिए डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम बंद करना शामिल है। पटवारियों का कहना है कि ऐप में कई तकनीकी खामियां हैं, जिनके कारण खेतों में जाकर फसलों का सत्यापन करने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा पटवारी लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की मांग भी कर रहे हैं।
धान खरीदी की तैयारियों पर पड़ सकता है असर
छत्तीसगढ़ में नवंबर से धान खरीदी शुरू होनी है। इससे पहले डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए यह जानकारी जुटाई जानी है कि किस किसान ने कितनी जमीन पर कौन-सी फसल लगाई है। यह जानकारी धान खरीदी की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में सर्वे पूरा होने से पहले पटवारियों के हड़ताल पर जाने से सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मुख्य सचिव ने दिए थे सर्वे जल्द पूरा करने के निर्देश
हड़ताल से दो दिन पहले मुख्य सचिव विकासशील ने सभी जिला कलेक्टरों के साथ वर्चुअल बैठक की थी। बैठक में उन्होंने पीवी ऐप के जरिए डिजिटल क्रॉप सर्वे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। सरकार चाहती है कि धान खरीदी शुरू होने से पहले फसलों का सत्यापन पूरा हो जाए, लेकिन पटवारियों की हड़ताल से इस काम में देरी होने की आशंका है।
अब सरकार और पटवारी संघ की बातचीत पर नजर
पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राजस्व विभाग के नियमित कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार और पटवारी संघ के बीच मांगों को लेकर कोई सहमति बनी है या नहीं। अब देखना होगा कि सरकार पटवारियों की समस्याओं का समाधान कैसे निकालती है और धान खरीदी से पहले लंबित सर्वे का काम कैसे पूरा कराती है।









