नई दिल्ली। संसद के तीन दिन के विशेष सत्र के पहले दिन गुरुवार को लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए गए, जिनका मकसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करना है।
ये विधेयक हैं संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण मिलेगा, जबकि विपक्ष इसे “परिसीमन के नाम पर सत्ता हथियाने की साजिश” बता रहा है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन को रात 11 बजे तक चलने की घोषणा की।
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह “महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” है। उन्होंने विपक्ष से अपील की, राजनीतिक चश्मे से न देखें, राष्ट्रीय हित में समर्थन करें। जो आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। पीएम ने कहा, यह संसद इतिहास रच रही है। दशकों की प्रतीक्षा खत्म हो रही है।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कोई राज्य अपनी अनुपातिक ताकत नहीं खोएगा। सभी राज्यों की सीटें करीब 50% बढ़ेंगी। उन्होंने 850 सीटों का गणित समझाया और कहा, जनगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जाति-आधारित गणना भी होगी। अखिलेश यादव के सवाल पर शाह ने जोर दिया, धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने विपक्ष की ओर से बहस शुरू करते हुए कहा कि हम महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे मौजूदा 543 सीटों पर लागू करें। परिसीमन को आरक्षण से जोड़कर देरी की जा रही है। यह बैकडोर परिसीमन है और राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।
वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2011 जनगणना के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा, यह OBC समुदाय के प्रतिनिधित्व को कमजोर करेगा। पीएम मोदी नई जनगणना से डरते हैं क्योंकि उससे OBC की ताकत सामने आएगी। अगर ईमानदारी से कर रहे होते तो पूरा संसद सर्वसम्मति से समर्थन करता। महिलाएं उन पुरुषों को पहचानती हैं जो उन्हें बार-बार गुमराह करते हैं।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि हम महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन पहले जनगणना (जाति-आधारित सहित) कराएं। यह परिसीमन देश का चुनावी नक्शा बदलने की साजिश है। OBC और मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण में शामिल क्यों नहीं? सरकार जाति जनगणना टाल रही है। शाह के साथ उनकी तीखी बहस हुई।
INDIA गठबंधन ने परिसीमन प्रावधानों का विरोध किया। दक्षिणी राज्य (जैसे DMK) और शिरोमणि अकाली दल ने चेतावनी दी कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन उत्तर को फायदा पहुंचाएगा।
विधेयकों का क्या है मकसद?
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: अनुच्छेद 81, 82 और 334A में बदलाव का प्रस्ताव। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 (राज्यों से 815 + केंद्र शासित प्रदेशों से 35) करने का प्रावधान। 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के तुरंत बाद 33% महिला आरक्षण लागू होगा (SC/ST महिलाओं सहित)। आरक्षण 15 साल के लिए, हर परिसीमन चक्र के बाद रोटेशन।
परिसीमन विधेयक, 2026: 2002 के कानून को निरस्त कर नया परिसीमन आयोग गठित करने का प्रावधान। नवीनतम प्रकाशित जनगणना (2011) के आधार पर लोकसभा-विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण। आयोग के आदेश अदालत में चुनौती नहीं दिए जा सकेंगे।
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे UTs में विधानसभा सीटों और आरक्षण के लिए जरूरी संशोधन।
सरकार का तर्क है कि 2023 का कानून जनगणना-परिसीमन से बंधा था, अब इसे 2011 डेटा पर आगे बढ़ाकर 2029 चुनाव से पहले लागू किया जाएगा। लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।









