पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को मिला बड़ा सम्मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक कला, रंगमंच और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ रंगकर्मी और पद्मश्री सम्मानित अनूप रंजन पांडेय को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (Sangeet Natak Akademi Award) के लिए चुना गया है। इस घोषणा के बाद प्रदेश के कला और सांस्कृतिक जगत में खुशी का माहौल है।

अनूप रंजन पांडेय लंबे समय से लोक संगीत, लोक रंगमंच और पारंपरिक कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। कला क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदेश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका

अनूप रंजन पांडेय उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने का काम किया। उनकी प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने राज्य की परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया। उन्होंने लोक कला को केवल मंचीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि नई पीढ़ी को इससे जोड़ने और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए। उनके कार्यों के कारण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सम्मान मिला है।

किसान परिवार से शुरू हुआ प्रेरणादायक सफर

21 जुलाई 1965 को बिलासपुर जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अनूप रंजन पांडेय का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। शुरुआती दिनों से ही उन्हें लोक संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि थी। अपने इसी जुनून को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से लोक संगीत विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा और शोध के माध्यम से उन्होंने लोक परंपराओं को समझा और उनके संरक्षण के लिए लगातार काम किया।

हबीब तनवीर से मिली नई दिशा

अनूप रंजन पांडेय के कलात्मक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वर्ष 1988 में उनकी मुलाकात देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर से हुई। इसके बाद वर्ष 1990 में वे ‘नया थियेटर’ से जुड़े। नया थियेटर के साथ काम करते हुए उन्हें देश और विदेश के कई मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इसी दौर में उन्होंने लोक रंगमंच की गहराई को समझा और उसे व्यापक पहचान दिलाने के लिए नए प्रयोग किए।

बस्तर बैंड के जरिए लोक कला को नई पहचान

अनूप रंजन पांडेय को बस्तर बैंड के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। इस पहल के माध्यम से उन्होंने आदिवासी और लोक सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया। बस्तर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया तक पहुंचाने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से सराहा जाता है। उनके प्रयासों से अनेक लोक कलाकारों को मंच और पहचान मिली है।

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारतीय प्रदर्शन कला क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। अनूप रंजन पांडेय को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और रंगमंच के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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