जिस ट्रेन में थे मोहन भागवत उस पर पथराव, लखनऊ में हुआ था विरोध, लगे ‘गो बैक’ के नारे

Opposition to Mohan Bhagwat

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश में लखनऊ से मेरठ जा रही वंदे भारत ट्रेन पर गुरुवार दोपहर पथराव की घटना सामने आई। यह घटना हरदोई जिले के कौढ़ा गांव के पास करीब 3:20 बजे हुई। पत्थर लगने से ट्रेन की एक खिड़की का शीशा टूट गया। घटना के समय ट्रेन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी सवार थे। हालांकि इस पथराव में उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

इसके पहले बुधवार को लखनऊ विश्विद्यालय पहुंचे मोहन भागवत का जमकर विरोध हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय का परिसर बुधवार को उस समय अखाड़ा बन गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने के लिए विभिन्न छात्र संगठन सड़क पर उतर आए।

परिसर के मालवीय सभागार में आयोजित ‘शोधार्थी संवाद’ कार्यक्रम में मोहन भागवत के पहुंचने से पहले ही एनएसयूआई (NSUI), समाजवादी छात्र सभा और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने ‘गो बैक’ के नारों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन और संघ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और तीखी नोकझोक के बाद कई छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।

यूजीसी गाइडलाइन का किया समर्थन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि समाज में अपनापन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए।

हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की जरूरत है. हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है।हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने की बात कही।उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए. जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा।

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