‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ का विरोध तेज, राजधानी के बाद जगदलपुर में ऐतिहासिक विरोध

March 28, 2026 10:42 PM
Chhattisgarh Religion Independence Bill

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा से पास हुआ ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ (Chhattisgarh Religious Independence Bill) को लेकर विवाद तेज हो गया है। रायपुर में 27 मार्च को राजधानी में हुए ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन के बाद 28 मार्च को जगदलपुर में कई सामाजिक, धार्मिक और नागरिक संगठनों ने विधेयक का विरोध करते हुए राज्यपाल से इस पर सहमति न देने की मांग की है।

भारत मुक्ति मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि इस विधेयक को वापस विधानसभा भेजा जाए और इस पर व्यापक समीक्षा कराई जाए।

संगठनों का कहना है कि यह नया कानून राज्य में पहले से लागू मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968की जगह लाने की तैयारी है, लेकिन इसके कई प्रावधान बेहद कठोर और नागरिक अधिकारों के खिलाफ बताए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित कानून में सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। वहीं महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े मामलों में 10 से 20 साल तक की सजा और 10 से 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसके अलावा अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है और सोशल मीडिया व डिजिटल माध्यमों को भी इस कानून के दायरे में शामिल किया गया है। संगठनों का आरोप है कि इससे पुलिस और प्रशासन को अत्यधिक शक्तियां मिल जाएंगी, जिनके दुरुपयोग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

संगठन ने कहा कि यह विधेयक संविधान के Article 14, Article 19, Article 21 और Article 25 में दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।

खास तौर पर धर्म के प्रचार-प्रसार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर इसके असर को लेकर चिंता जताई गई है।

संगठनों का आरोप है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है, जिससे निर्दोष लोगों के उत्पीड़न का खतरा बढ़ सकता है।

भारत मुक्ति मोर्चा के बस्तर प्रभारी मनबोध बघेल ने बताया कि यदि यह कानून लागू हुआ तो धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है, सामाजिक तनाव और धार्मिक सद्भाव पर भी असर पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने ने राज्यपाल से अपील की है कि इस विधेयक को मंजूरी न दी जाए और सभी समुदायों, नागरिक समाज और कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर इस पर सुनवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।

यह भी पढ़ें: ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ के खिलाफ मसीही समाज के लोगो का उमड़ पड़ा सैलाब, राज्यपाल से विधेयक को अनुमति न देने की अपील

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories