रायपुर। 1 जुलाई डॉक्टर्स डे के अवसर पर छत्तीसगढ़ के युवा चिकित्सकों ने अपनी व्यथाओं को सामने रखा है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने द लेंस से कहा कि हर साल डॉक्टर्स को ‘धरती का भगवान’ कहकर बधाई दी जाती है लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश के इंटर्न्स, पोस्ट-ग्रेजुएट्स और सीनियर रेजिडेंट्स गंभीर मानसिक व पेशेवर तनाव से गुजर रहे हैं। उन्होंने सरकार से खोखली बधाइयों के बजाय बुनियादी अधिकारों और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण देने की अपील की।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि महंगाई के इस दौर में इंटर्न्स का स्टाइपेंड बेहद कम है, जबकि PGs और SRs को 36 घंटे की लगातार ड्यूटी के बदले सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल रहा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CGMC) में पंजीकरण की जटिल और लंबी प्रक्रिया के कारण डॉक्टरों का करियर महीनों तक अटका रहता है। उन्होंने संविदा और बॉन्ड वाली व्यवस्था को समाप्त कर नियमित नौकरियों की मांग की।
JDA अध्यक्ष ने डॉक्टरों के साथ अस्पतालों में हो रही हिंसा पर चिंता जताते हुए पुख्ता सुरक्षा कानून और ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ की मांग की। साथ ही राज्य सरकार द्वारा बाहर के डॉक्टरों (Outsiders) को बिना सख्त मापदंडों के प्रैक्टिस की अनुमति देने के फैसले को स्थानीय युवा चिकित्सकों के हितों पर कुठाराघात बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
प्रमुख मांगें:
इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाया जाए, PGs/SRs को महंगाई के अनुरूप मानदेय
CGMC में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तेज, डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए
नियमित भर्ती हो, संविदा संस्कृति बंद हो
डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून
स्थानीय डॉक्टरों के हितों की रक्षा
दरअसल छत्तीसगढ़ की बदहाल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था पर द लेंस लगातार रिपोर्ट कर रहा है और डॉक्टरों की समस्याएं दिखा रहा है आम जन से लेकर सरकार तक बात पहुंचा रहा है। डॉक्टर्स डे जैसे दिवस पर डॉक्टरों का ये संदेश खोखली व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है।











