जातीय जनगणना के पहले कांग्रेस के ओबीसी नेताओं का बड़ा जमावड़ा

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी आज दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ओबीसी नेतृत्व भागीदारी न्याय सम्मेलन का आयोजन करेगी। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शामिल होंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस ने कहा, “ओबीसी के अधिकार छीने जा रहे हैं। उचित प्रतिनिधित्व नहीं है। हमारा अधिकार हमारी आबादी के बराबर है – और हम इसे हासिल करेंगे।” इस आयोजन का उद्देश्य राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना तथा जाति आधारित जनगणना की मांग को मजबूत करना है। राहुल गांधी लगातार प्रमुख संस्थानों में ओबीसी प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि ओबीसी, दलित और आदिवासी—जो देश की लगभग 90 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं—को सत्ता और अवसरों में उनका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। OBC Mahasammelan

राहुल ने माना चूक हुई

तेलंगाना जाति सर्वेक्षण 2024 पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए गुरुवार को राहुल ने कहा, ‘दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के मुद्दों पर कांग्रेस सही रास्ते पर थी, लेकिन हम ओबीसी समुदाय की जरूरतों और आकांक्षाओं को समझने में पीछे रह गए।’ भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा को हटाने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि जातिगत वास्तविकताओं की सही तस्वीर भाजपा की विचारधारा के मूल को चुनौती देगी।

केंद्र सरकार करा रही जातीय जनगणना

30 अप्रैल, 2025 को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भारत में जाति जनगणना कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी – जो आजादी के बाद पहली ऐसी प्रक्रिया होगी।

1947 के बाद से कोई जाति जनगणना नहीं हुई है। कांग्रेस सरकारों ने हमेशा इसका विरोध किया है। 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे को कैबिनेट के पास भेजा था। मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था, और हालांकि कई दलों ने इस विचार का समर्थन किया था, कांग्रेस ने इसे एक औपचारिकता मात्र समझा और केवल सर्वेक्षण कराने की बात कही।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में अब तक कुल आठ जाति जनगणनाएँ हो चुकी हैं—सात ब्रिटिश शासन के दौरान 1872 से 1931 के बीच, और एक आज़ादी के बाद 2011 में। हालाँकि, 2011 की जाति जनगणना के निष्कर्ष कभी सार्वजनिक नहीं किए गए।

दो चरणों में होगी जातीय जनगणना

गृह मंत्रालय ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना के कार्यक्रम की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। 16 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार, यह कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण 1 अक्टूबर, 2026 को शुरू होगा, जिसमें चार पहाड़ी राज्य – हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख शामिल होंगे। दूसरा चरण 1 मार्च, 2027 को देश भर के शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा। यह 2011 के बाद भारत की पहली जनगणना होगी, क्योंकि 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण विलंबित हो गई थी।

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