नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB REPORT 2026) द्वारा बुधवार को जारी ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट में देश की कानून-व्यवस्था की मिश्रित तस्वीर सामने आई है। कुल पंजीकृत अपराधों में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन साइबर अपराध और आर्थिक अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
राष्ट्रीय स्तर पर अपराधों का पूरा आंकड़ा
2023 में देशभर में 62.41 लाख संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए थे, जो 2024 में घटकर 58.86 लाख रह गए।
अपराध दर (प्रति लाख आबादी) 448.3 से घटकर 418.9 हो गई यह 2019 के बाद सबसे कम है।
भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) के तहत 35.44 लाख मामले दर्ज हुए।
विशेष एवं स्थानीय कानूनों (SLL) के तहत 23.41 लाख मामले दर्ज हुए।
साइबर और आर्थिक अपराधों में चिंताजनक वृद्धि
रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक यह है कि साइबर अपराध में 17.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2023 में 86,420 साइबर अपराध थे, जो 2024 में बढ़कर 1,01,928 हो गए। इनमें से 72.6 प्रतिशत (73,987 मामले) धोखाधड़ी से जुड़े थे। आर्थिक अपराधों में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई , 2023 के 2,04,973 मामलों से बढ़कर 2,14,379 मामले।
व्हाइट-कॉलर अपराध IPC के कुल मामलों का 6 प्रतिशत हिस्सा बन गए। 2019 से 2024 के बीच कुल 2.2 करोड़ IPC अपराध दर्ज किए गए। 2020 में कोविड के दौरान अपराध बढ़कर 43 लाख हो गए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 35 लाख रह गई।
महिलाओं के खिलाफ अपराध
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
2024 में 4.41 लाख मामले दर्ज हुए (2023 में 4.48 लाख)।
अपराध दर 66.2 से घटकर 64.6 प्रति लाख महिला आबादी हो गई।
मुख्य कारण: पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता, अपहरण और इज्जत पर हमले।
बच्चों की स्थिति
2024 में 98,375 बच्चे लापता हुए, जो 2023 के 91,296 से 7.8 प्रतिशत अधिक हैं।
बच्चों के खिलाफ अपराधों में भी कई राज्यों में वृद्धि दर्ज की गई।
POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है।
अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े
हत्या के मामले: 27,049 (2.4% की कमी)। मुख्य कारण — आपसी विवाद और दुश्मनी।
अनुसूचित जाति (SC) के खिलाफ अपराध: 55,698 मामले (3.6% की कमी)।
अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराध: 9,966 मामले (23.1% की भारी कमी)।
विदेशियों के खिलाफ अपराधों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
प्रदर्शन और चुनौतियां
रिपोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की दर, लंबित मामले और अदालतों में दोषसिद्धि दर में केवल मामूली बदलाव देखा गया। साइबर अपराधों की जांच, फॉरेंसिक क्षमता और तेज न्याय प्रक्रिया अभी भी देश के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। NCRB रिपोर्ट का संदेश स्पष्ट है पारंपरिक अपराधों में कमी के बावजूद, साइबर फ्रॉड, आर्थिक अपराध और बच्चों-महिलाओं की सुरक्षा नई और गंभीर चुनौतियां बनकर उभरी हैं।











