रायपुर। लोकसभा में महिला अरक्षण संशोधन बिल गिरने के विरोध में छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुलाए गए विशेष सत्र की कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर (Mohammad Akbar) ने निंदा की है। यह सत्र 30 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला मौका है जब भाजपा सरकार किसी निंदा प्रस्ताव को पारित कराने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुला रही है।
मोहम्मद अकबर ने जोर देकर कहा कि विधानसभा द्वारा पारित कोई भी निंदा प्रस्ताव सिर्फ प्रतीकात्मक होता है। इसका किसी भी कानून या संवैधानिक प्रक्रिया पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं पड़ता। यह महज एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भर है। अब यह देखना होगा कि भाजपा जिसे यह संदेश देना चाहती है, वह संदेश उन तक पहुंचता है या नहीं यह समय ही बताएगा।
मोहम्मद अकबर ने कहा है कि लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पास न होने के बाद भाजपा अब लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण संबंधी विधेयक पहले ही वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में संसद से पारित हो चुका है। इसके तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बन गया है। अब भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर मनमाने ढंग से परिसीमन कराने का अपना एजेंडा पूरा नहीं हो पाने पर गैर-भाजपा दलों पर झूठा आरोप लगा रही है कि उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं होने दिया। जबकि हकीकत यह है कि यह विधेयक दो साल पहले ही कानून बन चुका है।
मोहम्मद अकबर ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत विधानसभा का सत्र बुलाने का अधिकार राज्यपाल के पास है, लेकिन वास्तव में यह फैसला मंत्रीमंडल की सलाह पर ही लिया जाता है। यदि सरकार किसी जरूरी मुद्दे पर चर्चा करना चाहे तो वह विशेष सत्र बुलाने की सिफारिश कर सकती है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा का मुख्य उद्देश्य ही यह है कि राज्य अपनी जनता के लिए स्वतंत्र रूप से शासन चला सके और स्थानीय समस्याओं का समाधान कर सके। निंदा प्रस्ताव आमतौर पर नियमित सत्र में लाया जाता है और ज्यादातर विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों या कामकाज की आलोचना करने के लिए पेश किया जाता है।











