टमाटर पर युद्ध की मारः किसानों को हर्जाना दे सरकार

Middle East tensions impact tomatoes

ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले से खाड़ी में भड़के युद्ध का चौतरफा असर अब देखा जा सकता है, जिससे देश के किसान भी नहीं बचे हैं। सरकार भले ही युद्ध से उपजे हालात से निपटने की पूरी तैयारी होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही खबरें बता रही हैं कि इसका सीधा असर टमाटर जैसी जल्द नष्ट हो जाने वाली फसल उगाने वाले किसानों पर पड़ रहा है। महाराष्ट्र के जालना जिले से बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां एक किसान अमर काकड़े ने टमाटर की अपनी 25 क्विंटल फसल सड़क पर बिखेर दी, क्योंकि मंडी में व्यापारी उसे चार रुपये किलोग्राम से अधिक में खरीदने को तैयार नहीं थे!

दरअसल खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिम एशियाई देशों को भेजे जाने वाले टमाटर का निर्यात ठप पड़ गया है। झारखंड और तमिलनाडु जैसे प्रदेशों से भी ऐसी खबरें आ रही हैं, जहां किसानों को बेहद कम दाम पर टमाटर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

पिछले कुछ बरसों में टमाटर और कुछ अन्य सब्जियों और फलों का संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में निर्यात बढ़ा है। टमाटर, सब्जियां और फल जल्दी नष्ट हो जाते हैं, लिहाजा खाड़ी के देशों में उनका निर्यात किसानों और व्यापारियों दोनों के हित में है, क्योंकि वहां तक इन्हें जल्दी पहुंचाया जा सकता है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया भारत में पैदा होने वाले चावल, केला, मसाले, मांस और डेयरी उत्पादों का एक बड़ा बाजार है। 2025 में भारत के खुल खाद्य निर्यात को देखें तो इसमें से 21 फीसदी कृषि उत्पादों का निर्यात अकेले पश्चिम एशिया को किया गया था।

अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस युद्ध की मार अब कैसे हमारे किसानों पर सीधे पड़ रही है। दाम नीचे जाने से किसानों के लिए लागत भी निकालना मुश्किल हो गया है। यहां तक कि मंडी से वापस अपने घर ले जाने में भी ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है। यह वाकई पीड़ादायक है कि पूरे मौसम में किसान उम्मीद से फसल लगाए और उसकी लागत भी न निकल पाए।

अमूमन अधिक फसल होने के कारण ऐसी स्थितियां पहले भी आई हैं, जब किसानों ने टमाटर, प्याज और आलू जैसी फसलों को लागत तक न मिलने के कारण मजबूरी में सड़कों पर फेंक दिया।

याद दिलाने की जरूरत नहीं कि खुद प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का वादा किया था, मगर यहां हालत लागत तक न निकल पाने के बन गए हैं।

केंद्र सरकार के साथ ही उन राज्यों की सरकारों को तुरंत किसानों की स्थिति पर गौर करने की जरूरत है, जहां से टमाटर और अन्य सब्जियों का निर्यात प्रभावित हो रहा है। सरकार को तुरंत ऐसे किसानों के लिए प्राकृतिक आपदा की तरह मुआवजे या प्रोत्साहन की घोषणा करनी चाहिए।

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