छत्तीसगढ़ में मेडिकल पीजी सीटों में राज्य कोटा 50% से घटाकर 25% किया, कांग्रेस ने इस फैसले को बताया ‘छत्तीसगढ़ विरोधी’

December 9, 2025 2:43 PM

रायपुर | छत्तीसगढ़ में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बुरी खबर है। विष्णु देव साय सरकार ने सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस पास करने वाले छात्रों के लिए पीजी कोर्स (MEDICAL PG SEATS IN CG) में राज्य कोटा आधा कर दिया है। पहले यह कोटा 50 प्रतिशत था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

गौरतलब है की छत्तीसगढ़ राज्य के आयुष विश्वविद्यालय से संबंधित सभी सरकारी एवं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से पास किए हुए एमबीबीएस छात्रों के लिए पीजी सीट का कोटा पहले तक 50% स्नातकोत्तर पीजी सीटों में होता था वर्तमान में राज्य सरकार के राजपत्र में प्रकाशित नए नियम के अनुसार यह घटकर 25% ही रह जाएगा, वर्तमान में सभी राज्यों में 50% आवश्यक रूप से अखिल भारतीय स्तर की पीजी सीटों का कोटा होता है शेष 50% राज्य सरकार अपने मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्रों की पीजी सीटों के लिए सुरक्षित रखती है, इस प्रकार की 75% पीजी सीट का हक करने की व्यवस्था किसी भी राज्य में नहीं है।


प्रदेश कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने इसे प्रदेश के छात्रों के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा, ‘देश के सभी राज्यों में सामान्य नियम यही है कि आधी पीजी सीटें अखिल भारतीय कोटे की होती हैं और बाकी आधी सीटें राज्य सरकार अपने एमबीबीएस छात्रों के लिए सुरक्षित रखती है लेकिन छत्तीसगढ़ में अब केंद्र सरकार का कोटा 50% से बढ़ाकर 75% कर दिया गया है और राज्य कोटा घटाकर सिर्फ 25% रह गया है।’

डॉ. गुप्ता ने सवाल उठाया कि देश के किसी भी राज्य में ऐसा नियम नहीं है जहां राज्य का कोटा सिर्फ 25% और केंद्र का 75% हो। उनका कहना है कि इस फैसले से छत्तीसगढ़ के हजारों मेधावी छात्र प्रभावित होंगे जो अपने ही राज्य में एमबीबीएस के बाद पीजी करना चाहते हैं। अब उन्हें दूसरे राज्यों में जाना पड़ेगा या महंगे प्राइवेट कॉलेजों में सीट खरीदनी पड़ेगी।


कांग्रेस ने इस फैसले को ‘छत्तीसगढ़ विरोधी’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा, ‘भाजपा सरकार प्रदेश के छात्रों का भविष्य अंधकारमय कर रही है। हम मांग करते हैं कि यह गलत निर्णय तुरंत वापस लिया जाए और पुराना 50% राज्य कोटा बहाल किया जाए।’ फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और सरकार की ओर से इस मामले में कोई जवाब नहीं आया है। मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों में भी इस फैसले को लेकर काफी नाराजगी है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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