जानेमाने कथाकार मनोज रुपड़ा के साथ साहित्यिक कार्यक्रम में बदसलूकी, साहित्य अकादमी और गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने किया था आयोजन

January 7, 2026 9:19 PM
Manoj Rupada was mistreated

बिलासपुर। एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान जानेमाने लेखक मनोज रुपड़ा के साथ बदसलूकी की घटना सामने आई है। यह कार्यक्रम साहित्य अकादमी और गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया था।

बुधवार को ‘समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ’ विषय पर चर्चा के लिए मनोज रुपड़ा को विशेष रूप से बिलासपुर आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम में मोहन लाल छीपा, जया जादवानी, मीना गुप्त, मुन्ना तिवारी, जयनंदन और महेश कटारे जैसे कई जाने-माने साहित्यकार भी मौजूद थे।

कार्यक्रम की शुरुआत में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकुले सुनाते हुए अपना संबोधन दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने मंच पर बैठे मनोज रुपड़ा की ओर मुखातिब होकर पूछा कि क्या उनकी बातें सुनकर आप ऊब तो नहीं रहे? इस पर रुपड़ा ने शांतिपूर्वक जवाब दिया कि आप विषय से हटकर बोल रहे हैं।

लेकिन कुलपति को यह बात नागवार गुजरी। वे गुस्से में आ गए और सबके सामने पूछा, इन्हें यहां किसने बुलाया है? फिर उन्होंने रुपड़ा से कार्यक्रम छोड़कर बाहर जाने को कह दिया। मनोज रुपड़ा ने बिना देर किए हॉल से बाहर चले गए।

कार्यक्रम से निकलकर मार्क्सवादी विचारक राजेश्वर सक्सेना के घर जाते कथाकार मनोज रुपड़ा।

जिसके बाद जन संस्कृति मंच के बिलासपुर इकाई के सदस्यों ने बाहर जाकर रुपड़ा से बातचीत की और फिर उन्हें मार्क्सवादी विचारक राजेश्वर सक्सेना के घर ले गए।

जन संस्कृति मंच ने इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना छत्तीसगढ़ में साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करती है। मनोज रुपड़ा साहित्य अकादमी और विश्वविद्यालय के निमंत्रण पर ही आए थे। कई पुरस्कारों से सम्मानित इस लेखक का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता है। उन्होंने अपना काफी समय दुर्ग में बिताया, हालांकि अब वे नागपुर में रहते हैं।

मनोज रुपड़ा ने खुद इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कुलपति ने जब पूछा कि क्या आप बोर हो रहे हैं, तो मैंने सिर्फ इतना कहा कि आप संदर्भ से अलग बोल रहे हैं। इसके बाद वे क्रोधित हो गए और बाहर जाने को कहा। मैंने कहा कि अगर आपको ऐसा अधिकार है तो मैं चला जाता हूं, और मैं बाहर निकल आया।

इस घटना के विरोध में दुर्ग-भिलाई, रायपुर, अंबिकापुर, धमतरी और बिलासपुर में सक्रिय जन संस्कृति मंच के लेखकों व संस्कृतिकर्मियों ने कुलपति के इस तानाशाही रवैये की कड़ी भर्त्सना की है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि ऐसे व्यवहार के लिए कुलपति को विश्वविद्यालय से हटाया जाए।

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