रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग ऐप (Mahadev Betting App) केस से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। फ्री प्रेस जर्नल (FPJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में ले लिया गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चंद्राकर को कथित तौर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का इस्तेमाल कर ओमान में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।
फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, चंद्राकर को मस्कट के हाई सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। बताया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से निकलकर ओमान पहुंचने के बाद रॉयल ओमान पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार किया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई, जो प्रत्यर्पण मामलों की नोडल एजेंसी है, ने पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेज दिया है।
बताया गया है कि इस अनुरोध के साथ अदालत के रिकॉर्ड, गैर-जमानती वारंट, इंटरपोल रेड नोटिस और अन्य कानूनी दस्तावेजों का विस्तृत डोजियर भी भेजा गया है। ओमान के नियमों के अनुसार इन सभी दस्तावेजों का अरबी भाषा में अनुवाद भी कराया गया है।
फर्जी पासपोर्ट मामले में दर्ज हुआ केस
फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ओमान में सौरभ चंद्राकर के खिलाफ केस नंबर 82716/2026/1 दर्ज किया गया है। उन पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के इस्तेमाल और अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने का आरोप है।
रिपोर्ट के अनुसार, चंद्राकर ने मस्कट में कानूनी टीम भी नियुक्त कर ली है, लेकिन ओमानी कानून के तहत पासपोर्ट धोखाधड़ी और अवैध प्रवेश जैसे गंभीर आरोपों के कारण उन्हें जमानत मिलना आसान नहीं माना जा रहा है।
पहले ओमान में चलेगा मुकदमा, फिर हो सकता है प्रत्यर्पण
फ्री प्रेस जर्नल ने जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ओमान के कानून के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति ने वहां अपराध किया है, तो आमतौर पर पहले उसी देश में उसके खिलाफ मुकदमा चलता है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो सजा पूरी होने के बाद ही प्रत्यर्पण या निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
ऐसे में भारत की एजेंसियों के लिए सौरभ चंद्राकर को जल्द भारत लाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग ऐप मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं।
इंटरपोल ने भी खारिज की थी याचिका
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में इंटरपोल ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर ने दावा किया था कि भारत में उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक कारणों से हो रही है, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया और माना कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
महादेव ऐप मामले में पहले से जांच जारी
महादेव ऑनलाइन बुक ऐप देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई पहले से मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टेबाजी और हवाला के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी रहा बड़ा मुद्दा
महादेव बेटिंग ऐप का मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान भी इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी हुई थी। ईडी की जांच में कई कारोबारी, पुलिस अधिकारी और राजनीतिक हस्तियों के नाम सामने आने के दावे भी किए गए थे।









