माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर पर MP से लेकर CG तक सियासी बयानबाजी, दिग्विजय सिंह और चरण दास महंत ने क्‍या कहा?

November 24, 2025 12:53 AM
Madvi Hidma Encounter

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इनामी नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के मारे जाने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इस एनकाउंटर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें सोनी सोढ़ी दावा कर रही हैं कि यह कोई मुठभेड़ नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी।

इस ट्वीट के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का हर कोई विरोधी है, लेकिन जब तक नक्सली हथियार न उठाएं, तब तक बातचीत से समाधान निकालना बेहतर होता है। अगर वे गोली चलाते हैं तभी जवाबी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन दशकों से नक्सलवाद खत्म करने की कोशिश हो रही है, पहले संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, नहीं मानें तो फिर बल प्रयोग करें।

दिग्‍विजय सिंह ने पोस्‍ट में कहा, “मैं नक्सली हिंसा का घोर विरोधी हूं। उनके साथ कोई समझौता हो कर उन्हें आत्म समर्पण कराया जाता है मैं उसके पक्ष में हूं। विषय कुछ और है। क्या बस्तर संभाग आदिवासी क्षेत्र में भारत सरकार PESA लागू करना चाहती है या नहीं? क्या बस्तर के खनिज सम्पत्ति में स्थानीय आदिवासी की भागीदारी होगी? क्या SIR की शर्तों को देखते हुए उनके पास पर्याप्त प्रमाण होंगे जिस से उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो सकेगा? भाजपा आदिवासी हितों की कभी समर्थक नहीं रही।”

सुरक्षा बलों ने दक्षिण बस्तर के जंगलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए हिड़मा और उसकी पत्नी राजे को मार गिराया था। दोनों के शव उनके पैतृक गांव पूवर्ति में भारी भीड़ के बीच अंतिम संस्कार के लिए लाए गए। अंतिम संस्कार में सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे। इसी दौरान सोनी सोढ़ी भी वहां पहुंचीं और उन्होंने हिड़मा की मौत को “हत्या” करार देते हुए कहा कि वे इस मामले को कोर्ट तक ले जाएंगी। उन्होंने हिड़मा की तुलना छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध क्रांतिकारी शहीद गुंडाधुर से कर दी, जिससे राजनीतिक हलकों में भारी हंगामा मच गया।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “कोर्ट सबके लिए खुला है, जो जाना चाहें जा सकते हैं। लेकिन जिन्हें सबसे बड़ा ज्ञान हो गया है, उनसे अनुरोध है कि बस्तर में जिन मासूम आदिवासियों का नक्सलियों ने सामूहिक नरसंहार किया, जिनके गले काटे गए, उनकी पीड़ा पर भी थोड़ा सोच लें।”

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