नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के कथित जमीन घोटाले का माल सामने आने से महज तीन दिन पहले प्रदेश नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक चौंकाने वाला पत्र लिखा था जिसमें इंदौर से जुड़े कई मुद्दों पर नाराजगी जताई है।
इस पत्र में उन्होंने कहा है कि पिछले ढाई सालों से उन्हें केवल असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ा है। उनका कहना है कि प्रदेश के मुखिया और इंदौर के प्रभारी मंत्री होने के नाते उन्हें सरकार से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पत्र से भाजपा के बीच की सिर फुटौवल खुल कर सामने आ गई है।
इंदौर के मास्टर प्लान का मुद्दा
विजयवर्गीय ने लिखा कि यह प्लान दो साल पहले मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका है। विभाग और मुख्य सचिव स्तर पर कई बार चर्चा भी हुई, लेकिन आज तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। इस संबंध में पहले भी लेटर लिखा गया था, लेकिन न तो कोई जवाब मिला और न ही इस पर चर्चा हुई।
मेट्रोपॉलिटन रीजन का मुख्यालय उज्जैन बनाने पर आपत्ति
उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह क्षेत्र मुख्य रूप से इंदौर केंद्रित है, इसलिए इसका नाम केवल इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिफिकेशन में इंदौर का महत्व कम किया गया है।
इंदौर की उपेक्षा को बनाया मुद्दा
पत्र में राजीव गाँधी प्रोफेशनल यूनिवर्सिट के प्रस्तावित विभाजन का भी जिक्र किया गया है। विजयवर्गीय ने कहा कि भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में नई इकाइयों का प्रस्ताव है, लेकिन इंदौर को नजरअंदाज कर दिया गया। जबकि यहां 1952 से एसजीएसआईटीएस संस्थान और 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज मौजूद हैं।
औद्योगिक विकास में पीछे करने का दर्द
उन्होंने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, यहां 650 से ज्यादा एमएसएमई और 176 से अधिक बड़े उद्योग होने के बावजूद नेशनल लेवल की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर अब तक नहीं बनाए गए हैं। दूसरी ओर नए औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
इसके अलावा विजयवर्गीय ने इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराने, सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों में इंदौर को शामिल नहीं करने और जल संकट के समय शहर को विशेष राहत नहीं मिलने पर भी नाराजगी जताई है।
विजयवर्गीय की खुली धमकी
लेटर के आखिर में उन्होंने लिखा कि अगर इन सभी मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो इंदौर की जनता के हित में उन्हें सार्वजनिक मंच पर अपनी बात उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।जब इस लेटर को लेकर मीडिया ने कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है।
इस पर पार्टी स्तर पर चर्चा चल रही है और फिलहाल वे इस विषय पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह लेटर मीडिया तक कैसे पहुंचा।











