रायपुर। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ ने राज्य सरकार के एक फैसले का कड़ा विरोध जताया है। सरकार ने चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) में अपर संचालक (चिकित्सा शिक्षा) के पद पर एक गैर-चिकित्सकीय (नॉन-मेडिको) प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। JDA का कहना है कि यह पद डॉक्टरों के पास होना चाहिए क्योंकि चिकित्सा शिक्षा एक अत्यंत तकनीकी और विशेष क्षेत्र है। राज्य शासन ने 7 जुलाई 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के जरिए यह पदस्थापना की थी। JDA ने इस आदेश पर तुरंत पुनर्विचार करने और उसे रद्द करने की मांग की है।
JDA का तर्क
JDA के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में लिए जाने वाले फैसले सीधे मेडिकल कॉलेजों, डॉक्टर्स, छात्रों और मरीजों की सेवाओं को प्रभावित करते हैं। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। इनकी राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मान्यता दिलाना, फैकल्टी की व्यवस्था करना और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
JDA का मानना है कि इन कामों को सही ढंग से केवल अनुभवी डॉक्टर ही संभाल सकते हैं, जिन्हें अस्पताल प्रबंधन, क्लीनिकल कामकाज और मेडिकल शिक्षा की गहरी समझ हो। गैर-डॉक्टर अधिकारी की नियुक्ति से नीति बनाने और फैसले लेने में दिक्कत आ सकती है।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने कहा, ‘चिकित्सा शिक्षा का नेतृत्व उन अनुभवी डॉक्टरों के हाथों में होना चाहिए जो मेडिकल शिक्षा, अस्पताल प्रबंधन और मरीजों की देखभाल की वास्तविकता समझते हों। हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार कर योग्य डॉक्टर की नियुक्ति की जाए।’
प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार यादव ने कहा, ‘यह विभाग सिर्फ प्रशासनिक नहीं है। यह चिकित्सा विज्ञान, पढ़ाई की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है। शीर्ष पदों पर डॉक्टरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।’
JDA रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने भी विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों, छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं के हित में यह फैसला सही नहीं है।
JDA की मुख्य मांगें
अपर संचालक (चिकित्सा शिक्षा) के पद पर योग्य और वरिष्ठ डॉक्टर की नियुक्ति हो।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के सभी महत्वपूर्ण और तकनीकी पदों पर डॉक्टरों को प्राथमिकता दी जाए।
7 जुलाई का नियुक्ति आदेश तुरंत रद्द किया जाए।
भविष्य में ऐसे फैसले लेने से पहले डॉक्टर संगठनों और विशेषज्ञों से सलाह ली जाए।
JDA ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य केवल चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत रखना है। संगठन ने कहा कि अगर सरकार जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो JDA लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना विरोध आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होगा।








