नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में संसद से पारित इस कानून ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले में तय व्यवस्था को बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कानून बनने तक CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली तीन सदस्यीय समिति की व्यवस्था बताई थी।
चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा का प्रावधान
जयराम रमेश ने कानून के उस प्रावधान पर भी सवाल उठाया, जिसमें चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक काम, फैसले या दिए गए बयान से जुड़े मामलों में सिविल और आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा दी गई है। अधिनियम की धारा 16 में इस तरह की कानूनी सुरक्षा का प्रावधान है। यह कानून 28 दिसंबर 2023 को अधिनियम बना और 2024 में लागू हुआ।
रमेश ने इस प्रावधान को लेकर कहा कि इससे चुनाव आयुक्तों के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की जांच और इन्वेस्टिगेशन को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप/व्याख्या है; कानून में धारा 16 के तहत आधिकारिक कार्यों से जुड़े सिविल और आपराधिक मामलों में अदालतों द्वारा कार्यवाही स्वीकार करने पर रोक का प्रावधान है। इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में केंद्र को नोटिस भी जारी किया था।








