धोनी-सूर्यवंशी के बिहार में क्या बदल रहा है खेल का माहौल?

Bihar

आईपीएल 2026 में Bihar के युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें वैभव सूर्यवंशी ने ऑरेंज कैप जीती और कई रिकॉर्ड बनाए। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलने वाले इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने कई पुराना रिकॉर्ड तोड़ कर इतिहास रच दिया। ईशान किशन,आकाशदीप, मयंक यादव, मोहम्मद इजहार, मुकेश कुमार, साकिब हुसैन और अनुकूल रॉय ने भी अपनी टीमों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बिहार जैसे राज्य से निकलकर आईपीएल जैसे बड़े मंच पर आकर अपना जलवा बिखेरना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान बात नहीं है।

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल जी ने ट्वीट कर IPL में बिहार की टीम बनाने की बात कही। उन्होंने लिखा है कि क्या आपको नहीं लगता Chennai Super Kings, Mumbai Indians और Kolkata Knight Riders की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए? बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पोस्ट को रिट्वीट कर उनका समर्थन किया। जिसके बाद बिहार में एक विश्व स्तरीय क्रिकेट स्टेडियम और आईपीएल टीम बनाने का समर्थन होने लगा।

वैभव सूर्यवंशी को लेकर पक्ष विपक्ष आमने-सामने

वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल में शानदार प्रदर्शन को देखते हुए नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है कि माननीय नीतीश कुमार जी की दूरदर्शी खेल नीति ने बिहार के युवाओं को नई उड़ान दी है। आधुनिक खेल सुविधाओं और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का ही परिणाम है कि आज वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी देशभर में बिहार का गौरव बढ़ा रहे हैं। 

जिसके जवाब में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने रीट्वीट कर लिखा है कि इतनी निर्लज्जता और फेंकूपना तो शायद मोदी जी में भी नहीं है! वैभव सूर्यवंशी आज जो हैं, वह खुद की मेहनत और अभिभावकों के त्याग के कारण हैं! लचर सरकार के बावजूद हैं, सरकार के कारण नहीं!

वैभव जिला स्तरीय खिलाड़ी से बिहार की टीम फिर आइपीएल और इंडिया अंडर 19 में जगह बनाई। अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत वह इंडिया ए टीम का हिस्सा बने, जहां से भारतीय टीम में एंट्री का दरवाजा खुलता है।

झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद 2018 तक बिहार क्रिकेट एसोसिएशन लगभग निष्क्रिय रहा। इसकी मान्यता और हित झारखंड स्टेट क्रिकेट एकेडमी को स्थानांतरित कर दिए गए। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद उस एकेडमी को पूर्णकालिक सदस्य के रूप में मान्यता मिली और पिछले 7–8 वर्षों में वह लगातार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर भेज रहा है। 2018 में बीसीए को बीसीसीआई की मान्यता मिलने के कारण ही वैभव सूर्यवंशी बिहार की जर्सी पहनकर आईपीएल और अंडर-19 इंडिया तक पहुंचा। 

वहीं आईपीएल में खेल रहे अन्य खिलाड़ियों की बात करें तो वैभव, साकिब और इजहार जैसे खिलाड़ी संसाधनहीन माहौल और टूटे-फूटे स्टेडियमों में खेलते हुए आईपीएल तक पहुंचे। वहीं ईशान, आकाशदीप, अनुकूल, मयंक और मुकेश को झारखंड और बंगाल जैसे दूसरे राज्य की टीम से खेलना पड़ा क्योंकि 2018 तक बिहार क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी में खेलने तक की इजाजत न थी।

“बिहार के क्रिकेटरों ने जो भी थोड़ी बहुत सफलता हासिल की है, वह अपने दम पर है। क्योंकि बिहार की टीम को तो लगभग 18 साल तक रणजी ट्रॉफी खेलने का भी अधिकार नहीं था। बिहार के क्रिकेटर दूसरे राज्यों की टीम से खेल खेलकर आगे बढ़ते रहे हैं। अभी भी बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का कुल बजट, किसी स्टार खिलाड़ी की आईपीएल फीस से भी कम है।” बिहार में फिजिकल शिक्षक बव्वा ठाकुर बताते है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बिहार के पटना में जन्मे सबा करीम बताते हैं कि,”आईपीएल टीम बनाने से पहले राज्य में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार करना आवश्यक है। आईपीएल में बिहार की टीम बनाने से पहले ऐसा प्लेटफार्म बनाएं, जिससे राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार हो। हमारे पास स्पोर्ट्स के जो इकोसिस्टम हैं, उसे मेंटेन करने पर जोर दिया जाए। तभी हम एक मेजर स्पोर्टिंग पावर बन सकते हैं।”

गड्ढों से भरी है बिहार क्रिकेट की पिच

कभी बिहार का कोई खिलाड़ी नेशनल टीम तक पहुंचता है, तो मालूम होता है कि वो खेल कूद की दुनिया में जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष किया या बिहार से बाहर निकल चुका होता है। हालांकि वैभव सूर्यवंशी अपवाद है। यहां खेल कूद की आधारभूत सुविधाओं का नितांत अभाव दिखता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आईपीएल में बिहार के खिलाड़ी का शानदार प्रदर्शन और नई स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और खेल परिसर को लेकर खूब चर्चा में रही है।

विशेषज्ञ के मुताबिक ‘खोखला’ या ‘स्पोर्ट्स डेफिसिट स्टेट’ के ‘परसेप्शन’ को तोड़ने के लिए बिहार सरकार कोशिशें कर रही है। लेकिन अभी भी जमीनी तौर पर काफी काम करना बचा हुआ है। 

वर्ष 2024 में कला, संस्कृति व युवा विभाग से अलग खेल विभाग का गठन किया गया। मकसद था कि राज्य में खेल का बेहतर माहौल बनाना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की खोज कर ओलंपिक जैसी प्रतियोगिता के लिए तैयार करना। खेल के लिए बिहार का बजट 680 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है लेकिन बिहार में लंबे समय से खस्ताहाल बुनियादी ढांचे, भ्रष्टाचार, राजनीति और प्रशिक्षित कोच की कमी का दंश झेल रहे खेल और खिलाड़ी अपनी पहचान बनाने की पुरजोर जुगत में हैं। 

‘राजधानी में अच्छे फील्ड बनाने से खिलाड़ी नहीं पैदा होगा। गांव के स्कूल में प्लेग्राउंड तो बना है लेकिन खेल नहीं हो पा रहा है। फिजिकल टीचर की सैलरी बहुत कम है। सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं दिखती है। आपको शायद ही किसी गांव या जिला में बेहतर खेल ढांचा और कोच मिलेगा। गांवों में प्रतिभाओं की पहचान अगर नहीं होगी, तो स्थापित आधारभूत संरचना का लाभ, राज्य को खेल पटल पर कैसे मिलेगा?’ स्काउट गाइड से जुड़े चंदन बताते है।

स्थानीय वेब पोर्टल पत्रकार विमलेंदु सिंह बताते हैं कि, ‘सोनबरसा राज प्रखंड के मलोधा गांव में स्कूल परिसर में बच्चों के लिए बास्केटबॉल कोर्ट बनाया गया। वित्तीय वर्ष 2024–25 में मनरेगा के तहत लगभग 9.51 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया यह कोर्ट और खेल सामग्री खरीद कर रख दी गई थी, लेकिन कभी बच्चे यहां खेलने नहीं आए। वर्षों तक इस्तेमाल न होने के कारण कोर्ट पर मक्के की फसल सुखाई जा रही है और खेल सामग्री भी धूल-जमी हालत में पड़ी है।’

“बिहार के गांव गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट होता है। ‌ इतना दीवानापन आपको किसी और राज्य में देखने को नहीं मिलेगा। ‌इसके बावजूद बिहार में एक भी मैच नहीं होता है। स्टेडियम तो दूर की बात है वहां का प्लेयर अच्छे सुविधा के लिए बाहर जा रहे हैं और अलग स्टेट से खेल रहे हैं।” सुपौल जिला स्तरीय खिलाड़ी राहुल कुमार बताते है।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश ठाकुर बताते हैं कि, ’70-80 के दशक में बिहार में खेल काफी प्रसिद्ध था। ‌राजधानी पटना के गांधी मैदान, मंगल तालाब, पटना कॉलेजिएट और मिलर हाई स्कूल में खेलों की अच्छी सुविधाएं थी। उस वक्त की तत्कालीन लालू सरकार के लिए खेल कोई मायने नहीं रखता था। शायद उनको लगता था कि ‘खेल’ एलिट क्लास का काम है।’

पिछले कुछ वर्षों में सरकार की उपलब्धि 

बिहार सरकार का भी दावा है कि वह राज्य में खेलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। पहले की तुलना में बिहार में खेल को लेकर बहुत काम हुआ है।

खेल विभाग के मुताबिक पहले की तुलना में बहुत काम हुआ है। सेपक टकटरा विश्वकप 2025,महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी-2024,रग्बी राजगीर रग्बी सेवन्स अंडर 20 चैंपियनशिप,खेलो इंडिया यूथ गेम्स और हीरो एशिया कप 2025 का आयोजन किया गया है। 

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत राज्य के कुल 367 प्रतिभावान खिलाड़ियों को नौकरी दी जा चुकी है। वहीं खेल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष वित्तीय सहायता का प्रावधान, वर्ष 2024-25 में कुल 120 खिलाड़ियों को 17.15 करोड़ की सहायता दी गई है। 

खिलाड़ियों को बेहतर माहौल देने के लिए बिहार स्थित राजगीर इंटरनेशनल स्पोर्ट्स स्टेडियम और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई है, जहां एक ही जगह पर फुटबॉल, हॉकी और क्रिकेट सहित 20 से ज्यादा खेल के लिए विश्वस्तरीय फील्ड और एकेडमी हैं। वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण के लिए स्पोर्ट्स साइंस और रिसर्च सेंटर भी बनाए गए हैं। 

इस बात के खिलाड़ियों ने बता दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती और बिहार प्रतिभाओं की धरती है, बस उन्हें अवसर मिलने की जरूरत है।

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