एक तरफ ‘आशीर्वाद का दीया’, दूसरी तरफ महंगाई की मार: बस्ती में बोले लोग- महंगे बिल और गैस के बीच कैसे जलाएं दीया?

Ashirwad ka Diya

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ में ‘आशीर्वाद का दीया’ (Ashirwad ka Diya) कार्यक्रम के तहत बड़े पैमाने पर दीप जलाए गए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी लोगों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में दीया जलाने की अपील की थी। यह कार्यक्रम एक महीने तक चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा है।

सरकारी स्तर पर प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर दीप जलाने का दावा किया गया। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 1.50 करोड़ से ज्यादा ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाए गए।

लेकिन राजधानी रायपुर में कार्यक्रम स्थल से महज करीब आधा किलोमीटर दूर तेलीबांधा की एक बस्ती में जब लेंस की टीम पहुंची तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। यहां कई लोगों ने कहा कि उन्होंने दीया नहीं जलाया।

कारण पूछा गया तो जवाब अलग-अलग थे, लेकिन ज्यादातर जवाबों में महंगाई, बिजली बिल, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी परेशानियां सामने आईं।

‘तेल नहीं है तो दीया कैसे जलाएं?’

बस्ती की एक महिला ने कहा कि घर में खाने-पीने का इंतजाम मुश्किल से होता है, ऐसे में दीया जलाने के लिए तेल कहां से लाएं। एक अन्य महिला ने कहा कि वह काम पर चली गई थी, इसलिए दीया नहीं जला पाई।

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की अपील की जानकारी थी, लेकिन उनके इलाके में दीया या तेल उपलब्ध नहीं कराया गया।

एक महिला ने बढ़े बिजली बिल का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले उसका बिल करीब 500-600 रुपये आता था, जबकि अब करीब 1200 रुपये तक पहुंच गया है।

एक अन्य महिला ने बताया कि उसके घर का बिजली बिल 2600 रुपये आया और बिल जमा नहीं होने पर बिजली काट दी गई। ऐसे में हम अपने घर की रोशनी के लिए परेशान हों या दीया जलाएं।

‘महंगाई इतनी बढ़ गई है, कैसे जलाएं?’

‘द लेंस’ से बातचीत में लोगों ने सिर्फ दीया न जलाने की वजह नहीं बताई, बल्कि रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया। लोगों ने तेल, राशन, गैस सिलेंडर और बिजली के बढ़ते खर्च की बात कही।

एक महिला ने कहा कि रोज कमाकर खाने वाले परिवार के लिए घर का खर्च चलाना ही मुश्किल है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीया जलाने के लिए अलग से तेल खरीदना उसके लिए प्राथमिकता नहीं है।

एक व्यक्ति ने कहा कि सरकार से मिलने वाली सुविधाओं और योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक नहीं पहुंच रहा है। वहीं एक शख्स ने वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलने की बात भी कही।

बस्ती में बिजली बिल से लेकर सफाई तक की शिकायत

बस्ती के लोगों ने बिजली बिल के साथ-साथ सफाई और पानी की समस्या भी बताई। लोगों का कहना था कि कचरा उठाने वाली गाड़ी आती है, लेकिन कई बार रुकती नहीं और बस्ती में गंदगी बनी रहती है।

कुछ लोगों ने नाली की सफाई और पानी की समस्या की शिकायत भी की।

एक महिला, जो दूसरे लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन का काम करती है, उसने अपने ही मोहल्ले की गंदगी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह दूसरों के घर साफ करती है, लेकिन उसके अपने मोहल्ले में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है।

‘दिया जलाने से पहले गरीब के घर का चूल्हा जले’

बस्ती में बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। एक महिला ने कहा कि अगर दीप जलाने पर खर्च होने वाला पैसा किसी गरीब परिवार की मदद में लगाया जाता तो उसे ज्यादा उपयोगी माना जाता।

एक व्यक्ति ने कहा कि उसके लिए सेवा का मतलब किसी भूखे को खाना खिलाना या जरूरतमंद की मदद करना है।

वहीं कुछ लोगों ने सरकारी कार्यक्रमों को लेकर कहा कि उनके लिए सिर्फ आयोजन से ज्यादा जरूरी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान है।

शराब को लेकर भी सामने आई शिकायत

बस्ती में महिलाओं ने शराब को लेकर भी परेशानी बताई। एक महिला ने कहा कि परिवार में शराब की वजह से घरेलू विवाद होते हैं और कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च हो जाता है।  उसने शराबबंदी की मांग भी रखी।

एक अन्य युवती ने बताया कि परिवार के कई सदस्य शराब पीते हैं और इसके कारण घर में झगड़े होते हैं। घर की कमाई का आधा हिस्सा शराब की वजह से बर्बाद हो जाता है।

उस युवती से जब पूछा गया तो उसने कहा कि पीएम मोदी कोई भगवान हैं क्या जो हम लोग दीया जलाएं।

कुछ ने दीया तो जलाया लेकिन अपनी समस्याएं भी गिना दीं

एक व्यक्ति ने बताया कि उसने घर में दीया जलाया था। उसने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के कारण उसने दीया जलाया, लेकिन साथ ही बिजली बिल, गैस सिलेंडर, महंगाई और पानी जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया।

उसने अपनी स्थिति को लेकर कहा कि वह प्रधानमंत्री से पूरी तरह खुश नहीं है और स्थानीय स्तर की कई परेशानियां अभी बनी हुई हैं।

यानी एक ही बस्ती में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीया जलाने वाले लोग भी मिले और दीया नहीं जलाने वाले लोग भी।

कार्यक्रम स्थल से आधा किमी की दूरी पर अलग तस्वीर

17 सितंबर की शाम तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। राज्य सरकार ने इसे प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन और उनकी 25 वर्ष की सार्वजनिक सेवा के प्रति शुभकामना और जनभागीदारी का कार्यक्रम बताया।

इसी कार्यक्रम स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर लेंस की टीम ने तेलीबांधा की बस्ती में लोगों से बात की।

यहां दीपों की रोशनी के बजाय लोगों की बातचीत में महंगाई, बिजली बिल, राशन, पानी, सफाई, रोजगार और शराब की समस्या ज्यादा प्रमुख रही।

सरकारी कार्यक्रम की तस्वीर में जहां बड़ी संख्या में दीये जलते दिखाई दिए, वहीं बस्ती के कई घरों में लोगों ने यह कहते हुए दीया नहीं जलाया कि उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतें ज्यादा बड़ी चुनौती हैं।

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रदेशभर में बड़ी संख्या में दीप जलाए जाने का सरकारी दावा है। दूसरी ओर, तेलीबांधा की इस बस्ती में द लेंस की ग्राउंड रिपोर्ट ने यह दिखाया कि सरकारी आयोजनों से कुछ ही दूरी पर रहने वाले लोगों की अपनी प्राथमिकताएं और परेशानियां क्या हैं?

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 13 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now