रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपट्टिकाओं को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) कार्यक्रम और राज्य सरकार के आधिकारिक जवाब को आमने-सामने खड़ा कर दिया।
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सदन में सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर मल्हार पर सही कौन है—पुरातत्व विभाग या प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’?
मामला ताम्रपट्टिकाओं में प्रयुक्त भाषा और उसकी खोज को लेकर है। पीएम मोदी ने 31 मई को अपने मन की बात कार्यक्रम में इस भाषा को पाली बताया था, जबकि विधानसभा में दिए जवाब में ताम्रपत्रों पर अंकित भाषा को संस्कृत बताया गया है। वहीं, पीएम मोदी ने खोज को ज्ञान भारतम् अभियान के तहत बताया था, जबकि विधानसभा में दिए जवाब में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जानकारी दी कि इसकी खोज 1987 में हुई और विभाग से 2005 में प्रकाशित ग्रंथ ‘उत्कीर्ण लेख‘ में इसे प्रकाशित किया गया।
विधानसभा का जवाब विभाग के विशेषज्ञ और अनुभवी अधिकारी तैयार करते हैं। इनमें ऐसे अधिकारी भी हैं जो दशकों से छत्तीसगढ़ के पुरातत्व और यहां की संस्कृति का अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों से हासिल सूचना के आधार पर ही विधान सभा के लिए विभाग का जवाब तैयार होता है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने ज्ञान भारतम् अभियान के तहत राज्य की प्राचीन पांडुलिपियों और ताम्रपत्रों के सत्यापन तथा मल्हार से प्राप्त बालार्जुन के ताम्रपत्र की स्थिति को लेकर सरकार से सवाल पूछा।
विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने सरकार से पूछा कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान के तहत छत्तीसगढ़ से अब तक कुल कितनी प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं? इनमें से कितनी प्रविष्टियां सत्यापित और कितनी असत्यापित हैं? मल्हार से प्राप्त बालार्जुन के ताम्रपत्र सत्यापित हैं या नहीं? संबंधित अभिलेख वर्तमान में किसके आधिपत्य में है? इन ताम्रपत्रों की खोज कब हुई थी तथा इनकी लिपि और भाषा क्या है?
इन सवालों के जवाब में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने लिखित जवाब में बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत मोबाइल ऐप के माध्यम से छत्तीसगढ़ से 886 प्रविष्टियां पोर्टल पर दर्ज की गई हैं। इनमें से 453 प्रविष्टियां (12,040 पांडुलिपियां) सत्यापित की जा चुकी हैं। जबकि 433 प्रविष्टियां (11,238 पांडुलिपियां) अभी असत्यापित हैं।
अपने जवाब में विधानसभा में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह पेटिका शीर्ष ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में लिखी गई है। मंत्री ने जानकारी दी कि इसकी खोज 1987 में हुई और विभाग से 2005 में प्रकाशित ग्रंथ ‘उत्कीर्ण लेख‘ में इसे प्रकाशित किया गया।
जब मंत्री ने अपने जवाब में यह बताया कि बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त प्रसिद्ध बालार्जुन ताम्रपट्टिका की खोज वर्ष 1987 में हुई तब विधायक राघवेंद्र सिंह ने पूछा कि विभाग ने जो जानकारी दी वह सही है या प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में दी गई वह जानकारी कि इसकी खोज भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के तहत हुई थी?
राघवेंद्र सिंह ने यह भी पूछा कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इसकी लिपि पेटिका शीर्ष ब्राह्मी तथा भाषा संस्कृत है। जबकि मन की बात में पीएम मोदी ने इसकी भाषा को पाली कहा, तो सही कौन हैं ?
जवाब में मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा– ‘मुझे इसकी जानकारी नहीं है!’
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है। इस पर जानकारी आनी चाहिए कि क्या विभाग के अधिकारियों ने गलत जानकारी दी?इस पर मंत्री कहते सुने गए – मैं इसे दिखवाऊंगा,जांच करवाऊंगा!
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जब देश के सामने कोई बात कहते हैं तो करोड़ों लोग उसे सही मानते हैं और उस पर विश्वास करते हैं। लेकिन आज सदन में सरकार की ओर से दिया गया जवाब प्रधानमंत्री के बयान से अलग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारियों ने गलत तथ्य तैयार कर मंत्री से सदन में गलत जवाब दिलवाया है। विधायक ने मांग की कि यदि अधिकारियों ने सदन को गुमराह किया है तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
विपक्ष के सवालों के बीच संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि विभागीय स्तर पर तथ्य प्रस्तुत करने में कोई गलती हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि ‘जो भी अधिकारी इस विसंगतिपूर्ण जानकारी के लिए जिम्मेदार होंगे, उनके खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’










