मिजोरम में तैनात आईपीएस ने दिल्ली में छापेमारी कर हड़प लिए 35 लाख, दर्ज हुई FIR

February 10, 2026 10:35 PM
IPS Shankar Chaudhary

नई दिल्ली। आईपीएस अधिकारी शंकर चौधरी (IPS Shankar Chaudhary) पर दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने केस दर्ज किया है। जॉइंट सीपी दक्षिणी रेंज की शिकायत पर हुई कार्रवाई के बारे के बताया जाता है कि मिजोरम में एसपी (नार्कोटिक्स) के पद पर तैनाती के दौरान दिल्ली में आकर बिना अनुमति रेड करने, विदेशी नागरिकों को अवैध हिरासत में रखने और जब्त संपत्ति का गबन करने का आरोप है । इनपर इन आरोपों में यह मामला दर्ज किया गया है।

पूरी घटना नवंबर 2023 की बताई जाती है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, शंकर चौधरी उस समय मिजोरम में तैनात थे, लेकिन अपनी छुट्टी खत्म होने के बाद भी वह बिना अनुमति दिल्ली में रुके रहे। 21 नवंबर से 29 नवंबर 2023 के बीच, उन्होंने बिना किसी सक्षम अधिकारी की मंजूरी या स्थानीय पुलिस को सूचित किए, दिल्ली के डाबड़ी और द्वारका इलाकों में ‘नार्कोटिक्स’ की रेड की।

आरोप है कि शंकर चौधरी ने अपने पुराने संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों और सरकारी वाहनों का निजी तौर पर उपयोग किया। उन्होंने ‘हैरिसन’ नामक एक नाइजीरियाई नागरिक को बिना किसी गिरफ्तारी वारंट या कागजी कार्रवाई के उसके घर से उठाया।

​मिजोरम हाउस में अवैध जेल और लॉकर की चोरी

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सीसीटीवी फुटेज से हुआ। फुटेज में दिखता है कि 26 नवंबर 2023 की रात शंकर चौधरी अपनी टीम के साथ हैरिसन के घर में घुसे और वहां से एक लॉकर और दो बैग लेकर निकले। मजे की बात यह है कि इस जब्ती का कोई ‘सीजर मेमो’ नहीं बनाया गया और न ही सामान को मालखाने में जमा कराया गया, जो सीधे तौर पर गबन का मामला बनाता है।

​इसके बाद, हैरिसन को वसंत विहार स्थित ‘मिजोरम हाउस’ ले जाया गया, जहां उसे 26 से 29 नवंबर तक अवैध रूप से कैद रखा गया। पुलिस रिकॉर्ड में उसकी गिरफ्तारी का कोई जिक्र नहीं था। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब 29 नवंबर 2023 को पुलिस को एक पीसीआर कॉल मिली।

एक नाइजीरियाई महिला ने आरोप लगाया कि ‘मिजोरम पुलिस ने मेरे भाई को गिरफ्तार किया है, 35 लाख रुपये हड़प लिए हैं और अब 20 लाख रुपये और मांग रहे हैं।’ कॉल करने वाली महिला ने सीधे तौर पर शंकर चौधरी का नाम लिया था। हालांकि जांच अधिकारी को रिश्वत के सीधे सबूत नहीं मिले, लेकिन कॉल के तुरंत बाद हैरिसन को छोड़ दिया गया और वह देश छोड़कर भाग गया, जो संदेह पैदा करता है।

ज्वाइंट सीपी एस.के. जैन की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि शंकर चौधरी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और प्रक्रियात्मक नियमों की धज्जियां उड़ाईं। उनके साथ काम करने वाले दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों हेड कांस्टेबल शालूज, विकास और प्रशांत के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है, क्योंकि उन्होंने बिना लिखित आदेश के गैर-कानूनी काम में साथ दिया।

​फिलहाल, एसीपी विनय कुमार मलिक को इस मामले की आगे की जांच सौंपी गई है। एक आईपीएस अधिकारी पर इस तरह के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज होना पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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