मृतक IPS पूरन कुमार पर गंभीर आरोप लगाकर एक सब इंस्पेक्टर ने की आत्महत्या, वीडियो में खोले राज

October 14, 2025 7:49 PM
IPS Puran Kumar suicide case

चंडीगढ़। हरियाणा में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या का सिलसिला बदस्तूर जारी है। आईजीपी पूरन कुमार के बाद रोहतक में साइबर सेल में तैनात एक एएसआई ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को घटनास्थल से तीन पन्नों का सुसाइड नोट और एक वीडियो मैसेज मिला है।

मृतक एएसआई ने अपने सुसाइड नोट में दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एएसआई ने लिखा है कि वाई पूरन कुमार भ्रष्टाचार में लिप्त थे और जातिवाद का सहारा लेकर सिस्टम को हाइजैक कर रहे थे। मृतक ने पूरन कुमार की पत्नी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार, सुसाइड नोट में एएसआई ने लिखा कि उसने “भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ शहादत” दी है। उसने पूरन कुमार के परिवार की जांच की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, मृतक एएसआई उस जांच टीम का हिस्सा था, जो आईपीएस वाई पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार से जुड़ी थी।

फिलहाल, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। सुसाइड नोट और वीडियो को फॉरेंसिक टीम ने कब्जे में ले लिया है।

सुसाइड नोट में क्या लिखा

अपने सुसाइड नोट में एएसआई ने लिखा, “मैं संदीप कुमार दयानंद, गांव जुलाना, जींद से हूं। मैंने अपनी जिंदगी में हमेशा सच्चाई का साथ दिया है। मुझे सच्चा और नेक आदमी बहुत पसंद है। मेरे दादाजी और छोटे दादाजी देश के लिए लड़े और सेना में रहे। छोटे दादाजी तो सात साल बर्मा में देश की लड़ाई के दौरान कैद में रहे।

मेरी रगों में देशभक्ति है। देश और समाज से बड़ा कोई नहीं है। मैं भगत सिंह को अपना आदर्श मानता हूं, क्योंकि उन्होंने देश को आजाद करवाने में लोगों को जगाया। वह लीजेंड थे। अगर भगत सिंह जैसे लोग न होते, तो क्या देश आजाद होता? वे भाग सकते थे, लेकिन नहीं भागे। उनकी नस्लें हमें प्रेरणा देती हैं।

जातिवाद समाज में एक बड़ा मुद्दा है। भ्रष्टाचार और जातिवाद हमेशा सच्चाई और आदर्शों में बाधा डालते हैं। हरियाणा में आईएएस अधिकारी व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार करते हैं, परंतु बीजेपी की सरकार में कुछ ईमानदार अफसर थे, जिन्होंने काफी हद तक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई। डीजीपी साहब ईमानदार और निडर व्यक्ति हैं। शुरुआत में मुझे माहौल में ढलने में बहुत कठिनाइयां आईं, पर मेरा मन हमेशा सत्य के साथ था और रहेगा।”

इस नोट में उन्होंने आगे लिखा, “हमने अपराध पर लगाम लगाने के लिए बहुत प्रयास किए और काफी हद तक कई अफसरों का सहयोग और अच्छा मार्गदर्शन मिला। हमें सही दिशा में प्रेरित किया गया, परंतु आईजी पूरन कुमार का तबादला रोहतक रेंज में होते ही उन्होंने भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की तैनाती आईजी दफ्तर में कर दी और ईमानदार व कर्मठ कर्मियों का तबादला कर दिया।

उन्होंने जातिवाद का जहर हमारे मुलाजिमों में घोला। मुलाजिमों को आईजी दफ्तर में बुलाकर फाइलों के नाम पर डराकर पैसे लिए और बिना शिकायत के रोहतक रेंज से फाइलें मंगवाकर उनमें छोटी-मोटी कमियां निकालकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। एसआई सुनील और गनमैन सुशील पैसे ऐंठते थे।

महिला पुलिसकर्मियों को ऑफिस में बुलाकर तबादले के नाम पर परेशान करके यौन शोषण किया गया। सामान्य नागरिकों और व्यापारियों को बुलाकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और मोटी रिश्वत ली गई। अपराध को बढ़ावा ही नहीं दिया, बल्कि जुल्म की पराकाष्ठा की गई।”

अपने नोट में उन्होंने आगे लिखा, “कोई आवाज उठाने की कोशिश करता, तो वह कहता कि मेरा बाल भी बांका नहीं होगा, क्योंकि मेरी पत्नी आईएएस है, साला एमएलए है और पूरी फैमिली एससी आयोग में है। मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा। यहीं से आईजी पूरन कुमार को भ्रष्टाचार करने की ताकत मिलती थी और उन्होंने दबाकर भ्रष्टाचार किया। उच्च अधिकारियों और सीएम की जानकारी में यह बात आने पर उनका तबादला किया गया।

तबादले के बाद एक व्यापारी, जिसे बदमाशों और गुंडों द्वारा पहले भी धमकी दी गई थी, उसे अपने ऑफिस में बुलाकर बेइज्जत किया और मां-बहन की गालियां दीं। उनके ऑफिस में जाकर गनमैन सुशील कुमार ने पैसे लिए, जिसकी सीसीटीवी फुटेज और वॉयस रिकॉर्डिंग पेश करके उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

आईजी साहब का नाम केस में आने पर उन्होंने जातिगत आयोग का सहारा लिया और मामले को राजनीतिक रंग देने के लिए झूठा सुसाइड नोट तैयार करके आत्महत्या की। यह कदम केवल गिरफ्तारी से बचने के लिए उठाया गया और इससे आईएएस पत्नी को ईमानदार अफसरों को टारगेट करने का मौका मिल गया। पूरे हरियाणा में जातिगत जहर घोलकर ईमानदार और कर्मठ अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।”

अंत में संदीप कुमार ने लिखा, “यह सच्चाई और ईमानदारी की भ्रष्टाचार से लड़ाई है। इसमें सच्चाई सामने आनी चाहिए। आईएएस पत्नी अपना भ्रष्टाचार उजागर न हो, संपत्ति की जांच न हो, इसलिए यह ढोंग कर रही है। परंतु सच्चाई नहीं हारनी चाहिए। यह हमारे देश और समाज के लिए आगे बढ़ने में बहुत जरूरी है।

हमारे समाज के काले कौवे और भ्रष्टाचारी इस लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश में हैं। वे भूल गए कि हमारी रगों में देशभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई है। मेरे जैसे सौ जानें कुर्बान, लेकिन देश नहीं झुकेगा और सच्चाई की जीत होगी। इस सच्चाई और ईमानदारी की लड़ाई में मैं पहली आहुति दे रहा हूं।”

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