India-US trade deal: टैरिफ में कटौती, लेकिन चुनौतियां बरकरार

February 7, 2026 11:14 PM
India-US trade deal

लेंस डेस्‍क। India-US trade deal: भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील को लेकर एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी की, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण कदम है। इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया है, जबकि कुल टैरिफ दर को 18 प्रतिशत तक घटा दिया गया है।

समझौते में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर कुछ टैरिफ कम करने का वादा किया है, साथ ही रूसी तेल के आयात को रोकने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।

अधिकारियों का कहना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य साकार होगा, जो भारतीय निर्यातकों, किसानों और एमएसएमई के लिए नए बाजार खोलेगा। हालांकि, विपक्ष ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है, जबकि विशेषज्ञों ने अनिश्चितताओं पर चिंता जताई है।

केंद्रीय पीयूष गोयल ने रखा सरकार का पक्ष

भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दोनों राष्ट्रों के लिए फायदेमंद एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को काफी कम कर दिया है, जबकि चीन पर 35% और बांग्लादेश तथा वियतनाम जैसे देशों पर 25% तक का टैरिफ जारी रखा है। भारत पर अब सिर्फ 18% टैरिफ लगेगा, जो पहले के उच्च स्तर से काफी बेहतर है।

मंत्री गोयल ने जोर दिया कि कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिका अब पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच देगा। इनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न-आभूषण, हीरे, विमान पार्ट्स, चाय, कॉफी, मसाले, आम, नारियल तेल, सुपारी, कुछ फल-सब्जियां, अनाज, तिल के बीज, खसखस और खट्टे फलों के जूस जैसे आइटम शामिल हैं। इससे भारतीय निर्यातकों, खासकर छोटे-मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और मछुआरों को विश्व की सबसे बड़ी 30 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था में बिना अतिरिक्त शुल्क के प्रवेश मिलेगा, जिससे निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है।

उन्होंने इस समझौते को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए भी सहायक बताया, क्योंकि इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी। गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की, जिनके मजबूत संबंधों और दूरदर्शी दृष्टिकोण से फरवरी 2025 से चली बातचीत इस सफलता तक पहुंची। इसका मकसद दोनों देशों के बीच सालाना 500 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना है।

अमेरिकी पक्ष: टैरिफ में कमी और रिफंड की व्यवस्था

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को तत्काल प्रभाव से हटा दिया, जो 7 फरवरी से लागू हो गया है। इस आदेश में पिछले साल अगस्त में रूसी तेल आयात के कारण लगाए गए दंड को वापस लेने का प्रावधान है, साथ ही पहले जमा किए गए टैरिफ पर रिफंड की सुविधा भी दी गई है।

समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम करने या हटाने का फैसला किया है। ट्रंप ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक हितों को मजबूत करेगा, साथ ही वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

रूसी तेल आयात पर प्रभाव

समझौते में भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बदले अमेरिका ने टैरिफ में कमी की है। अमेरिकी अधिकारियों को भारत के आयात की निगरानी का अधिकार दिया गया है और अगर रूसी तेल की खरीद दोबारा शुरू हुई तो 25 प्रतिशत दंड फिर से लगाया जा सकता है।

हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के रूसी तेल आयात में पहले से कमी आई है। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच रूस का हिस्सा 37.88 प्रतिशत से घटकर 32.18 प्रतिशत रह गया, जबकि अमेरिकी तेल का हिस्सा 4.43 प्रतिशत से बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गया। जनवरी 2026 में रूसी आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है और स्रोतों का विविधीकरण बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा।

विपक्ष ने बताया किसानों के साथ धोखा

विपक्षी दलों ने समझौते की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि संयुक्त बयान में विवरण की कमी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी से लगता है कि भारत रूसी तेल आयात बंद करेगा और अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए आयात शुल्क में भारी कटौती करेगा। उन्होंने इसे ‘नाम नरेंद्र, काम सरेंडर’ करार दिया और कहा कि इससे भारत का व्यापार सरप्लस खत्म हो जाएगा।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश से झूठ बोला और किसानों को बर्बाद करने के लिए अमेरिकी अनाज और फलों को शून्य टैक्स पर बाजार में आने दिया। उन्होंने एपस्टीन फाइल्स और अडानी को मिले समन का जिक्र कर कहा कि इससे 80,000 करोड़ का बोझ जनता पर पड़ेगा।

शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे वाशिंगटन का आदेश बताया, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्टता की मांग की। विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है।

अनिश्चितताएं और जोखिम बरकरार

CNBC TV18 एक रिपोर्ट में डब्ल्यूटीओ में भारत के पूर्व राजदूत जयंत दासगुप्ता ने कहा है कि समझौते को अंतिम रूप देना आसान नहीं होगा, क्योंकि दोनों पक्षों की अपेक्षाओं में अभी भी बड़ा अंतर है। उन्होंने चेतावनी दी कि 18 प्रतिशत टैरिफ कटौती के बाद भी ट्रस्ट डेफिसिट बना हुआ है, साथ ही कानूनी और भू-राजनीतिक जोखिम भी हैं। दासगुप्ता ने सुझाव दिया कि भारत को अमेरिका के साथ वादों में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि एक बार सहमति बनने पर इसे वापस लेना मुश्किल होगा। अन्य विशेषज्ञों ने भी कहा कि समझौता वस्त्र और रत्नों जैसे क्षेत्रों में फायदेमंद है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता एक बड़ा जोखिम है।

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