भारत विविधताओं का उत्सव है – प्रो. आर. के. मंडल

Prof. RK Mandal

रायपुर। भारत विविधताओं का उत्सव है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। भाषाएं, रंग, गीत, परंपराएं, खान-पान और वेशभूषाएं मिलकर भारत की आत्मा बनाती हैं। यदि यह विविधता समाप्त हुई तो भारत अपनी पहचान खो देगा। ये विचार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. आर. के. मंडल ने व्यक्त किए।

प्रो. मंडल रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन द्वारा आयोजित सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। सेमीनार का विषय ‘विविधता में एकता ही हमारी ताकत है’ था। यह आयोजन ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन के प्लेटिनम जुबली वर्ष के तहत देशभर में चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था।

प्रो. मंडल ने कहा कि आज के दौर का दुर्भाग्य है कि मिथकों के आधार पर एक धर्म, एक भाषा और एक संस्कृति जैसी धारणाएं समाज पर थोपी जा रही हैं। इतिहास का विकृतिकरण हो रहा है और नेहरू–गांधी सहित स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को खलनायक के रूप में पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृति बहुवचन होती है, उसे एकवचन में नहीं ढाला जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आत्मा ‘जन-गण-मन’ में प्रतिध्वनित होती है और हमारी स्मृतियां मिल-जुलकर रहने तथा मोहब्बत करने की मानवीय परंपरा से जुड़ी हैं। आज इन्हीं मानवीय मूल्यों पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं।

प्रो. मंडल ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने वैज्ञानिक चेतना को महत्व दिया, जबकि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और मानवीय करुणा को स्थापित किया। यही कारण है कि ये दोनों आज सबसे अधिक हमलों के निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि देश का शासन संविधान के अनुसार चलना चाहिए और संविधान की रक्षा करना हम सबका दायित्व है। इसके लिए अहिंसक रूप से सड़कों पर उतरकर प्रतिगामी ताकतों का मुकाबला करना होगा।

सेमीनार में सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन के महासचिव धर्मराज महापात्र ने कहा कि भारत की अवधारणा की जड़ में विविधता में एकता की भावना है। आज हमारी मिली-जुली संस्कृति और समाज सुधारकों की मानवीय परंपरा खतरे में है। यह लड़ाई वैचारिक है और इसका मुकाबला भी विचारधारात्मक स्तर पर ही संभव है।

सेमीनार की अध्यक्षता आरडीआईईयू के अध्यक्ष राजेश पराते ने की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बीमाकर्मी, शहर के ट्रेड यूनियन आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता और प्रमुख बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। प्रो. मंडल के वक्तव्य के बाद प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों के सवालों के जवाब उन्होंने दिए।

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