नई दिल्ली। यूपी की जनता पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी के साथ साथ दूध फल और सब्जियों के दाम बढ़ने के बाद अब बिजली भी महंगी हो गई। प्रदेश में जारी भारी बिजली संकट के बीच यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बिजली के दाम बढ़ा दिए हैं ऐसा इसलिए करना पड़ा है क्योंकि यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने फ्यूल सरचार्ज 10 प्रतिशत का इजाफा किया है। जून के बिजली बिल में उपभोक्ताओं को इस बढ़ी हुई राशि का भुगतान करना पड़ेगा। मार्च महीने के 10 प्रतिशत बकाया की वसूली जून में की जाएगी।
अगर किसी का बिल एक हज़ार रुपए आता है तो अब से उसे ११ सौ रुपये चुकाने होंगे। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अब तक का सबसे ज्यादा फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया गया है। माना जा रहा है कि UPPCL जून के बाद के महीनों में भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ा सकता है। अब तक कभी भी इतना फ्यूल चार्ज नहीं बढ़ाया गया. यह कोई नया आदेश नहीं है, बल्कि जनवरी 2025 से चली आ रही एक प्रक्रिया है।ह बढ़ोतरी मार्च 2026 महीने के लिए 10% ‘फ्यूल एंड पावर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज’ के कारण है, जिसे जून 2026 के बिल में जोड़ा जाएगा।UP विद्युत नियामक आयोग ने 8 जनवरी 2025 को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से यह नियम बनाया था कि किसी एक महीने का फ़्यूल सरचार्ज चौथे महीने के बिल में जोड़ा जाएगा।यूपी में बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या 3 करोड़ 73 लाख है जो देश में सर्वाधिक है।
नहीं भुला जाना चाहिए कि बिजलीघरों में डीजल का उपयोग बायलर को शुरू करने और आग को स्थिरता देने के लिए किया जाता है। बिजली विभाग के मुताबिक, बिजली बनाने और इसकी खरीद में आने वाली अतिरिक्त लागत की वजह से फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है, ताकि इसकी भरपाई की जा सके। मिडिल ईस्ट संकट के बीच फ्यूल की कीमतें आसमान छू रही हैं। पेट्रोल-डीजल समेत अन्य चीजें के दामों में बढ़ोतरी की गई है। इस बीच यूपी में अब बिजली के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं।कोयला आधारित बिजलीघरों के सामान्य एक हज़ार मेगावाट के बिजलीघर के ऑपरेशन में लगभग 50,000 से 1,00,000 लीटर प्रति महीना डीजल की खपत होती है।
गर्मी के दिनों में ज्यादा ट्रिपिंग या बार-बार स्टार्ट-अप के दौरान यह खपत बढ़कर 2 लाख से 4 लाख लीटर (या इससे भी अधिक) प्रति महीना तक पहुंच सकती है। प्लांट जब फुल लोड पर लगातार चलता है, तो डीजल की खपत ना के बराबर होती है। सबसे ज्यादा डीजल बॉयलर को ठंडी स्थिति से चालू करने (Cold Start) में खर्च होता है, जहां एक बार में ही हजारों लीटर तेल लग जाता है।










