छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर से एक रोचक खबर सामने आई है। यहां जेल अधिकारी(Jail Officer) ने उम्र कैद की सजा काट रहे कैदी से इश्क हो गया। जैसे ही कैदी की सजा समाप्त हुई दोनों ने शादी कर ली।
दरअसल, जेल अधिकारी फिरोजा खातून और उम्रकैद की सजा काट रहे धर्मेंद्र को एक-दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से छतरपुर के लवकुशनगर में शादी रचा ली। खास बात ये भी रही कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने फिरोजा खातून का कन्यादान किया।
शादी की खबर सामने आते ही केंद्रीय जेल सतना में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कैदी से लेकर अधिकारी तक सभी ने इस जोड़े को बधाई दी। मुस्लिम अधिकारी ने ड्यूटी में जितनी ईमानदारी दिखाई है, निजी जीवन में भी उतनी ही हिम्मत दिखाई है।
जेल के अंदर अधिकारी को कैदी से हुआ प्यार
जानकारी के अनुसार सतना की सेंट्रल जेल की सहायक जेल अधीक्षिका फिरोजा खातून ने हत्या की सजा काट चुके एक कैदी से हिंदू रीति-रिवाज से छतरपुर के लवकुशनगर में शादी की।
इस विवाह में फिरोजा खातून का कन्यादान सतना के बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने किया। दरअसल, चंदला निवासी धर्मेंद्र सिंह, सतना की जेल में हत्या के मामले आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। वहीं, उसके और जेल अधिकारी के बीच इश्क हो गया।
शादी में मुस्लिम अधिकारी के परिजन नहीं हुए शामिल
जेल की चहारदीवारी के भीतर कानून-व्यवस्था संभालने वाली अधिकारी ने इस मामले से साफ संदेश दिया कि मोहब्बत और इंसानियत के बीच कोई मजहब नहीं आ सकता है। मुस्लिम अधिकारी के परिजन इस शादी के पक्ष में नहीं थे, वे इसलिए विवाह में शामिल भी नहीं हुए।
ये है पूरा मामला
दरअसल सतना के केंद्रीय जेल में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर पदस्थ मुस्लिम समाज से आने वाली महिला अधिकारी फिरोजा खातून की मुलाकात ड्यूटी के दौरान उम्र कैद की सजा काट रहे धर्मेंद्र से हुई थी।
जेल में महिला अधिकारी वारंट इंचार्ज थीं, वहीं सजा काट रहा युवक वारंट का काम करता था। यहां दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार परवान चढ़ा।
दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र को उसके अच्छे आचरण की वजह से साल 2022 में जेल से रिहा कर दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों का संपर्क नहीं टूटा। फोन पर घंटों होने वाली बातों ने उनके प्यार को और मजबूत किया और अंततः दोनों ने परिवार और समाज की परवाह किए बिना हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने का फैसला लिया।
धर्मेंद्र ने 2007 में नगर परिषद उपाध्यक्ष की हत्या की थी
साल 2007 में चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या और शव को जमीन में दफनाने के मामले में धर्मेंद्र को दोषी पाया गया था।
इस सनसनीखेज मामले में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी
करीब 14 साल जेल में बिताने के दौरान धर्मेंद्र के स्वभाव में बड़ा बदलाव आया। जेल प्रशासन ने उसके अच्छे आचरण को देखते हुए ही उसे समय से पहले रिहा करने की सिफारिश की थी।आज उसी धर्मेंद्र एक नया जीवन शुरू हुआ है।











