HORMUZ blockade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाई गई समुद्री नाकाबंदी के बीच एक चीनी स्वामित्व वाला टैंकर ‘रिच स्टार्री’ फारस की खाड़ी से बाहर निकलने में सफल रहा है। शिपिंग डेटा के मुताबिक, यह नाकाबंदी शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला पहला जहाज है। ट्रंप ने सोमवार को भारतीय समय के अनुसार शाम करीब 7:30 बजे ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज क्षेत्र पर नाकाबंदी का ऐलान किया था। इसका मकसद ईरान की तेल निर्यात क्षमता को रोकना है। अमेरिकी सेना अब इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर नजर रखे हुए है, जहां दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार होता है।
चीन से जुड़ा जहाज नाकाबंदी की परीक्षा ले रहा
‘रिच स्टार्री’ नाम का यह मीडियम रेंज टैंकर पहले ‘फुल स्टार’ के नाम से जाना जाता था। अमेरिका ने इसे 2023 में ब्लैकलिस्ट कर दिया था, क्योंकि यह ईरान के तेल-गैस व्यापार पर लगे प्रतिबंधों को तोड़ने में मदद कर रहा था। शिपिंग डेटा (एलएसईजी, मारिनट्रैफिक) के अनुसार, मंगलवार को यह जहाज होर्मुज से गुजरा। नाकाबंदी शुरू होने के समय यह ईरान के केश्म द्वीप के पास था। पहले इसने पीछे मुड़ लिया, लेकिन कुछ घंटों बाद फिर से बाहर निकलने की कोशिश की। इस दौरान जहाज ने अपना सिग्नल भेजा कि इसका मालिक और चालक दल चीनी है। जहाज में लगभग 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा था, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के हमरिया पोर्ट से लोड किया गया था। यह दूसरी बार 24 घंटे के अंदर फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था।
दुनिया भर में चिंता, व्यापारी इंतजार में
नाकाबंदी के नियम अभी स्पष्ट नहीं होने से कई देश और तेल व्यापारी सतर्क हैं। मिडिल ईस्ट और एशिया के व्यापारियों ने कहा है कि वे तब तक अपना कदम नहीं बढ़ाएंगे, जब तक पूरी जानकारी साफ न हो जाए। एक अन्य जहाज ‘एलपिस’ भी उसी समय ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था, लेकिन नाकाबंदी शुरू होने के बाद ट्रांसपोंडर चालू रहने वाले किसी जहाज के फारस की खाड़ी में प्रवेश करने की खबर नहीं आई।
बातचीत विफल, फिर नाकाबंदी
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत में ईरान ने 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन अमेरिका 20 साल की शर्त पर अड़ा रहा, जिससे कोई समझौता नहीं हो सका। ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इसके तुरंत बाद नाकाबंदी शुरू कर दी। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा लेकिन अन्य देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति मिल सकती है।
रूस का प्रस्ताव
रूस ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को अपने पास रखने का ऑफर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि यह प्रस्ताव अभी खुला है, हालांकि अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। रूस इस संकट को कम करने और दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने में मदद करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम रूस को सौंप दे, तो अमेरिका की चिंताएं कुछ कम हो सकती हैं और परमाणु समझौते का रास्ता आसान हो सकता है। फिलहाल स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि नाकाबंदी कितनी प्रभावी साबित होती है और चीन जैसी बड़ी शक्तियां इसका कैसे जवाब देती हैं।











