नई दिल्ली। गुजरात पुलिस ने एक आपराधिक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसने सरकारी दफ्तरों को फर्जी बम धमकियां भेजने के लिए 5 लाख से ज्यादा फर्जी जीमेल अकाउंट बनाए और चलाए थे। इन सुरक्षा कमियों को लेकर अब गूगल से जवाब तलब किया गया है।
भारत गूगल का सबसे बड़े यूजर बाजारों में से एक है। पहले भी यहां फायरबेस प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर वित्तीय घोटाले करने का मामला सामने आने के बाद कंपनी जांच के घेरे में है।गुजरात पुलिस ने इस सप्ताह एक ईमेल नेटवर्क तोड़ा, जिसे पुलिस ने “अंतर-राज्यीय” बम धमकियां भेजने वाला बताया। दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच में 2022 से इस्तेमाल हो रहे 5,13,847 जीमेल आईडी और पासवर्ड मिले।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि जांच में गूगल भी शामिल है। गुजरात पुलिस के वरिष्ठ साइबरक्राइम अधिकारी विवेक भेड़ा ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी जीमेल अकाउंट का इस्तेमाल पहले कभी नहीं देखा गया।भेड़ा ने कहा, “हम गूगल को लिखेंगे और उनसे नीति में बदलाव करने को कहेंगे ताकि सुरक्षा उपायों को दरकिनार न किया जा सके।” पुलिस जल्द ही गूगल को औपचारिक रूप से जांच का विषय बनाएगी।अल्फाबेट की कंपनी गूगल ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। यह स्पष्ट नहीं है कि गूगल पर क्या कानूनी आरोप या जुर्माना लग सकता है।
भारत में साइबरक्राइम से सालाना 2 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान होता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियां उन टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्मों पर भी नजर रख रही हैं जिनका अपराधियों ने दुरुपयोग किया।
गुजरात सरकार को 10 सितंबर को बम धमकी वाला ईमेल मिला। इसके कुछ दिन बाद नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हुआ था। पुलिस के अनुसार ईमेल में सम्मेलन के दौरान भारत के साथ सहयोग करने वाले देशों को भी धमकी दी गई थी।धमकी झूठी निकली। भेड़ा ने बताया कि गिरफ्तार एक आरोपी बांग्लादेश के एक खरीदार से संपर्क में था। वह अकाउंट के बैच खरीदता था और फर्जी ईमेल भेजने के लिए आंशिक भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में करता था।
पुलिस के लिए चिंता की बात यह भी है कि हर फर्जी अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लगा थाजो गूगल अकाउंट सुरक्षित रखने के लिए देता है। इतने बड़े पैमाने पर यह कैसे संभव हुआ, यह भी जांच का विषय है।










