नई दिल्ली। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को पास कर सकती है। अगर यह बिल पास हो गया तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने का अधिकार मिल जाएगा। इससे भारत भी प्रभावित होगा। प्रस्तावित संशोधन में विशेष रूप से भारत को भी ऐसे शुल्क के दायरे में आने वाले देशों में शामिल किया गया है।यह विधेयक पिछले महीने अमेरिकी सीनेट द्वारा 86-11 मतों से पारित किया गया था और अब प्रतिनिधि सभा में है। प्रतिनिधि सभा की नियम समिति ने इस विधेयक को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए एक संशोधन में विधेयक के टैरिफ प्रावधानों के तहत 10 देशों को 100 प्रतिशत तक के शुल्क के लिए पात्र के रूप में स्पष्ट रूप से नामित करने का प्रस्ताव है। इन देशों में चीन, भारत, तुर्की, अज़रबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य शामिल हैं।
ऐसा नहीं है कि बिल पास होते ही भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग जाएगा। इसके बजाय, यह विशेष रूप से भारत को ऐसे देश के रूप में चिन्हित करेगा जो 100 फीसदी टैरिफ के लिए पात्र होगा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आखिरी फैसला लेना होगा।
अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित विधेयक में देशों का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया था। इसके बजाय इसमें मात्रा के हिसाब से तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों का उल्लेख किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य रूसी नेतृत्व, उसके ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में शामिल जहाजों पर प्रतिबंध लगाना है। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देना है।











