AI Impact Summit में Galgotias University को चार IIT से भी ज्‍यादा जगह मिली

AI impact summit

नई दिल्‍ली। India AI Impact Summit में चीन के रोबोट को अपना बताकर फजीहत करने वाली गलगोटियास यूनिवर्सिटी को भारत मंडपम में जितनी जगह दी गई थी वह चार आईआईटी से भी ज्‍यादा थी। एक निजी संस्थान को इतनी बड़ी जगह देने के कारण इस विवाद में एक कड़ी और जुड़ गई है।

यह आयोजन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के अधीन है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वतंत्र संगठन है। प्रदर्शनी में जगह पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दी गई थी। आयोजकों का मानना था कि संस्थान खुद जिम्मेदारी से काम करेंगे और झूठे दावे नहीं करेंगे।

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार गलगोटियास यूनिवर्सिटी को भारत मंडपम के हॉल नंबर 6 में 155 वर्ग मीटर की बड़ी जगह मिली थी। यह जगह उसी हॉल में मौजूद चार आईआईटी (बॉम्बे, मद्रास, खड़गपुर, गांधीनगर) और आईआईटी कानपुर की एयरवाट रिसर्च फाउंडेशन के कुल स्थान से लगभग 15 प्रतिशत ज्यादा थी।

इन आईआईटी और फाउंडेशन को कुल मिलाकर सिर्फ 130 वर्ग मीटर जगह मिली। आईआईटी बॉम्बे और मद्रास को 35-35 वर्ग मीटर, खड़गपुर को 24, गांधीनगर को 18 और फाउंडेशन को 18 वर्ग मीटर जगह दी गई।

शैक्षणिक संस्थानों के लिए जगह की कीमत 9,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय थी। इस आधार पर गलगोटियास ने सरकार को लगभग 14 लाख रुपये (टैक्स और बिजली चार्ज अलग) दिए।

विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक प्रोफेसर नेहा सिंह ने यूनिट्री गो2 नाम के रोबोट डॉग को “ओरियन” बताकर यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित बताया। यह रोबोट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का तैयार उत्पाद है, जो बाजार में आसानी से मिल जाता है (कीमत करीब 1,600 से 2,800 डॉलर यानी लगभग 1.3 से 2.3 लाख रुपये)। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे तुरंत पहचान लिया और काफी हंगामा मच गया।

इसके बाद सरकार और आयोजकों ने यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल खाली करने को कहा, बिजली काट दी गई और वे वहां से हट गए। गलगोटियास ने बाद में माफी मांगी और कहा कि गलतफहमी हो गई, प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी या उन्होंने गलत शब्द बोल दिया।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार केवल असली और मूल काम दिखाना चाहती है, कोई भ्रामक या झूठा दावा नहीं चाहिए। इंडिया एआई मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने बताया कि यह प्रदर्शकों के समझौते का उल्लंघन था।

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