नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने कहा था कि उनकी संस्मरण पुस्तक Four Stars of Destiny एक साल से अधिक समय से केंद्रीय सरकार की मंजूरी के लिए लंबित है। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ किताब लिखने और प्रकाशक को सौंपने की थी, जबकि रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेना प्रकाशक का काम था।
यह टिप्पणी कसौली में खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल में हुई एक सत्र के दौरान आई, जहाँ उनकी किताब The Cantonment Conspiracy: A Military Thriller पर रियर एडमिरल निर्मला कन्नन (सेवानिवृत्त) के साथ चर्चा हुई थी।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जब एक अतिथि ने पूछा कि उनकी पुस्तक Four Stars of Destiny प्रकाशित क्यों नहीं हुई, तो पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, “मेरा काम किताब लिखना और प्रकाशकों को देना था। अनुमति लेना प्रकाशकों का काम था। उन्होंने किताब उन्हें सौंप दी। यह समीक्षा के अधीन है। एक साल से अधिक समय से समीक्षा चल रही है।”
जनरल ने आगे कहा कि प्रकाशक रक्षा मंत्रालय से निरंतर संपर्क में है। “इसलिए मुझे इसका पीछा करने की जरूरत नहीं है। गेंद अब प्रकाशक और मंत्रालय के पाले में है। लेकिन मैंने किताब लिखने का आनंद लिया, अच्छा हो या बुरा। बस इतना ही। मंत्रालय को जब उचित लगे, तब अनुमति देगा।
जनरल नरवणे की संस्मरणों को लेकर विवाद मुख्य रूप से संवेदनशील सैन्य अभियानों और सरकारी नीतियों के खुलासों पर केंद्रित है, जिसके कारण प्रकाशन में देरी हुई। जनरल नरवणे, जो दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारत के सेना प्रमुख रहे साथ ही 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष में भी शामिल रहे ।











