रायपुर। भारतीय स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी (Jamboree) को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच गुरुवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक संकेत सामने आया, जब उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का संशोधित प्रोटोकॉल जारी कर दिया गया।
पहले जारी कार्यक्रम में जहां विजय शर्मा का शुक्रवार को बालोद के दुधली गांव पहुंचकर स्काउट एंड गाइड्स की राष्ट्रीय जंबूरी के उद्घाटन में शामिल होना तय था, वहीं संशोधित प्रोटोकॉल में उनका दुधली जाना पूरी तरह रद्द कर दिया गया।
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का ऐन मौके पर इस विवादित आयोजन से पीछे हटना अब केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और पार्टी संगठन के भीतर चल रही पहली खुली लड़ाई को कम करने की नजर से देखा जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को लेकर गुरुवार को दो अलग-अलग आधिकारिक प्रोटोकॉल सामने आए। पहलेप्रोटोकॉलके तहतविजय शर्मा का नया रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा बालोद के दुधली गांव पहुंचना तयथा। दुधली में राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने का उल्लेखभी था। फिर कार्यक्रम के बाद बलौदाबाजार और रायपुर वापसी का पूरा शेड्यूल था।
नए शेड्यूल में दुधली जाने का कार्यक्रम पूरी तरह हटाया गया। केवल बलौदाबाजार (दमाखेड़ा) के प्रस्तावित मेले की बैठक में शामिल होने का उल्लेख। जंबूरी से संबंधित किसी भी कार्यक्रम का नाम तक नहीं है।

राजनीतिक हलकों में इसे सरकार द्वारा विवाद से दूरी बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इस आयोजन से पहले ही पार्टी ने दूरी बना ली थी। क्योंकि पिछले तीन दिनों से कांग्रेस लगातार जंबूरी को लेकर वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर घोटाले के आरोप लगा रही है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आयोजन को स्थगित करने की घोषणा की। इसके बावजूद भाजपा के किसी भी प्रवक्ता का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व पहले ही इस आयोजन से दूरी बना चुका है। यही वजह है कि विजय शर्मा के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि विभागीय मंत्री गजेंद्र यादव के अलावा कोई अन्य मंत्री मंच साझा नहीं करेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को बयान दिया, ‘जंबूरी शुरू हो रही है, यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है।’
हालांकि मुख्यमंत्री के अलावा सरकार के किसी अन्य वरिष्ठ नेता का बयान सामने नहीं आया। क्योंकि बुधवार को सरकार के दो-दो मंत्री का इस आयोजन को लेकर बयान आया था और उन मंत्रियों ने यह दावा तक किया था कि विवाद सुलझ गया है।
बृजमोहन बनाम सरकार बना जंबूरी का मंच

दरअसल, इस आयोजन के टेंडर को लेकर पहले गड़बड़ियां सामने आईं। फिर यह पूरा विवाद तब और गहराया जब भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राज्य परिषद की बैठक में बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में जंबूरी स्थगित करने का निर्णय लिया गया। राज्य आयुक्त इंद्रजीत सिंह खालसा ने इसे भ्रामक बताते हुए जंबूरी तय समय पर होने का दावा किया।
गुरुवार को विजय शर्मा का प्रोटोकॉल बदले जाने की घटना के पीछे की वजह स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के स्काउट एंड गाइड्स के पदेन अध्यक्ष होने को हाई कोर्ट में चुनौतीदेना है। और चुनौती भी किसी और ने नहीं बल्कि खुद सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दी है। इसके बाद पार्टी और सरकार दोनों ने धीरे-धीरे अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय शर्मा का संशोधित प्रोटोकॉल इसी बदले हुए समीकरण का परिणाम है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस पूरे विवाद पर तीखा तंज कसते हुए कहा, ‘बृजमोहन जैसे वरिष्ठ नेताओं की स्थिति देखकर दुख होता है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि भाजपा की सरकार रहते हुए उसके ही वरिष्ठ नेता को स्काउट एंड गाइड्स जैसे मामले में कोर्ट जाना पड़ रहा है।’
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