नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली में तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद से सटे इलाके में 7 जनवरी की सुबह तड़के नगर निगम (MCD) ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया।
इस दौरान भारी बवाल हुआ पुलिस पर पथराव भी किया गया।आधी रात के बाद भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ की गई इस कार्रवाई से इलाके मेंतनाव है।
मीडिया खबरों के अनुसार विरोध के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने पथराव किया, जिससे कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले छोड़े और रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई।

इलाके को छावनी में बदल दिया गया, सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई और आवागमन प्रतिबंधित रहा। पुलिस ने बॉडी कैमरा और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही है, साथ ही कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए यह कार्रवाई की गई, जिसमें करीब 17 से 30 बुलडोजरों की मदद से अवैध ढांचे ढहाए गए। इनमें मुख्य रूप से एक बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर (क्लिनिक), कुछ दुकानें और अन्य अनधिकृत निर्माण शामिल थे।
अभियान रामलीला मैदान के आसपास करीब 38,940 वर्ग फुट सरकारी जमीन पर फैले अतिक्रमण को साफ करने के लिए था, जो नवंबर 2025 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने हटाने का आदेश दिया था।
क्या है पूरा मामला
मस्जिद प्रबंधन समिति ने एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें मस्जिद की मूल 0.195 एकड़ जमीन से इतर ढांचों को अवैध बताया गया था।
समिति का दावा है कि यह वक्फ संपत्ति है और वे दिल्ली वक्फ बोर्ड को किराया देते हैं। उनका मुख्य विरोध कब्रिस्तान को प्रभावित करने से था, जबकि अतिक्रमण जैसे बारात घर और क्लिनिक पहले ही बंद कर दिए गए थे।
6 जनवरी को हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर एमसीडी, शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण और वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा। कोर्ट ने मामले को सुनवाई योग्य माना, लेकिन कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई। सभी पक्षों को चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया गया और अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय हुई।
एमसीडी का पक्ष है कि वैध दस्तावेज नहीं दिखाए गए, इसलिए कार्रवाई कानूनी थी और सिर्फ अवैध हिस्सों को ही निशाना बनाया गया। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।










