नई दिल्ली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि गृहमंत्री अमित शाह ने टाटा संस को अपने घर बुलाया था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण कोबकरारा जवाब देते हुए उन्होंने X पर कहा कि प्रिय श्रीमती सीताराम, वह कौन सा ‘कानूनी और व्यावसायिक मामला’ था जिसके चलते टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस को अमित शाह के आवास पर आमंत्रित किया गया था? उन्होंने यह भी पूछा कि आपका पहला चहेता कब मैदान में उतरेगा और टाटा के कौन-कौन से हिस्से उसे मिलेंगे? राहुल का कहना था कि अंततः, आपके तीन-चार चहेतों को छोड़कर भारत के सभी व्यवसायी पहले से ही आपसे नफरत करते हैं और उन्हें किसी उकसावे की आवश्यकता नहीं है।
इसकें पहले 28 अक्टूबर 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को टाटा संस के बोर्ड विवाद पर लगाए गए आरोपों पर जवाब दिया था। उन्होंने उन पर व्यावसायिक और कानूनी मामलों को राजनीतिक रंग देने तथा भारतीय व्यवसाईयों के बीच अविश्वास फैलाने का आरोप लगाया।उन्होंने लिखा कि “आपने बार-बार भारतीय उद्योग और हमारे उद्यमियों की सफलताओं की निंदा की है। अब क्या आप हमारे बिजेसमैन को अपने साथ अविश्वास और विषाक्तता फैलाने में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं
उन्होंने गांधी पर भारतीय उद्योग की आलोचना का भी सवाल उठाया और कहा कि क्या वे व्यावसायिक नेताओं को अपने राजनीतिक आरोपों में खींचने की कोशिश कर रहे हैं। सीतारमण ने कांग्रेस पर पुराने लाइसेंस-कोटा राज के जरिए उद्यमिता को दबाने का आरोप भी लगाया, जबकि मोदी सरकार की नीतियों को उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के पक्ष में बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय उद्योग को रोजगार सृजनकर्ता और आर्थिक विकास का चालक मानती है। अंत में उन्होंने गांधी से रचनात्मक तरीके से काम करने की अपील करते हुए कहा:“तो राहुल जी, हर जगह भूत देखना बंद करें।”
राहुल गांधी का बयान
इससे पहले उसी दिन राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि टाटा समूह को कमजोर किया जा रहा है और व्यावसायिक नेता चुप हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा: “टाटा को आपराधिक तरीके से नष्ट किया जा रहा है, और कोई भी व्यावसायिक नेता एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं करता। आप कब तक चुप रहेंगे? जब तक वे आपको अपने कब्जे में न ले लें? भारतीय व्यवसाय मोदी और शाह की खेलने वाली चीज नहीं है। आपके पास साहस नहीं है। हमारे पास है। हम इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे।”
क्यों मचा है टाटा पर विवाद?
यह बयानबाजी टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच चल रहे विवाद के बीच आई है। विवाद चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और टाटा संस की प्रस्तावित स्टॉक मार्केट लिस्टिंग को लेकर है। नोएल टाटा ने 17 सितंबर के बोर्ड प्रस्ताव की वैधता को चुनौती दी है, जिसमें चंद्रशेखरन का पांच साल का विस्तार मंजूर किया गया था। उन्होंने प्रक्रियागत आपत्तियां और कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के प्रावधानों का हवाला दिया है। नोएल टाटा टाटा संस की लिस्टिंग का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे टाटा समूह की शताब्दी पुरानी स्वामित्व संरचना और परोपकारी मॉडल कमजोर हो सकता है।
टाटा ट्रस्ट्स (जो टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी रखता है) का मानना है कि पब्लिक लिस्टिंग से होल्डिंग कंपनी पर अल्पकालिक शेयरधारकों का दबाव बढ़ सकता है और दीर्घकालिक निवेश तथा धर्मार्थ गतिविधियों को समर्थन देने की क्षमता कमजोर हो सकती है।नोएल टाटा ने कंपनी से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियामकीय ढांचे के अंदर विकल्प तलाशने की अपील की है।










