दिल्ली के एक मोहल्ले जितनी आबादी वाला कुराकाओ पहुंचा फीफा विश्व कप में

November 20, 2025 1:42 PM

Curacao Football Team: फुटबॉल की दुनिया से एक हैरान करने वाली खबर आयी है। कैरेबियाई द्वीप का एक छोटा देश कुराकाओ ने जमैका के खिलाफ रोमांचक ड्रॉ खेलकर 2026 फीफा विश्व कप के लिए पहली बार क्वालीफाई कर लिया है। यह इस छोटे से देश की बड़ी उपलब्धि है। महज 1.56 लाख की आबादी वाला कुराकाओ अब विश्व कप खेलने वाला दुनिया का सबसे कम जनसंख्या वाला देश बन गया है। कुराकाओ नीदरलैंड्स का हिस्सा है, इसका कुल क्षेत्रफल महज 444 वर्ग किलोमीटर है। यहां की जनसंख्या 156,115 है, जो जनवरी 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक है। इससे पहले यह रिकॉर्ड आइसलैंड के पास था, जिसकी 2018 विश्व कप क्वालीफाई करते समय आबादी करीब 3.5 लाख थी।

ख़ास बात ये है कि कुराकाओ ने फीफा रैंकिंग में 82वें स्थान पर रहते हुए यह कमाल किया। भारत से तुलना करें तो यह आंकड़े और हैरान करने वाले हैं। नोएडा शहर की अनुमानित आबादी 2025 में लगभग 9.3 लाख है, जो कुराकाओ से करीब 6 गुना ज्यादा है। यहां तक कि दिल्ली का लाजपत नगर इलाका, जिसकी जनसंख्या करीब 1.37 लाख है, कुराकाओ के बराबर ही है। यानी एक पूरा देश दिल्ली के एक व्यस्त मोहल्ले जितना बड़ा है, लेकिन फुटबॉल के मैदान पर उसने दुनिया को चौंका दिया।

मैच का रोमांच अंत तक दिखा

किंग्सटन के नेशनल स्टेडियम में खेले गए निर्णायक मुकाबले में कुराकाओ ने जमैका को 0-0 से बराबरी पर रोका। दूसरा हाफ जमैका के दबाव से भरा रहा। उन्होंने तीन बार पोस्ट को हिलाया, लेकिन गोल नहीं हो सका। इंजरी टाइम में मिली पेनल्टी को वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) ने रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद कुराकाओ के खिलाड़ी मैदान पर उछल पड़े। कुराकाओ ने क्वालीफायर में एक भी मैच नहीं हारा। ग्रुप बी में 12 अंकों के साथ टॉप पर रहते हुए उन्होंने सीधा टिकट पक्का किया। कोच डिक एडवोकाट पारिवारिक कारणों से अनुपस्थित थे, लेकिन टीम ने अंततः सफलता हासिल कर ली।

2026 विश्व कप का ड्रॉ 5 दिसंबर को वॉशिंगटन डी.सी. में होगा। यह टूर्नामेंट पहली बार 48 टीमों के साथ अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में जून-जुलाई में खेला जाएगा। कुराकाओ की यह सफलता भारत जैसे बड़े देश के लिए आईना है। 135 करोड़ आबादी वाले भारत ने अब तक विश्व कप क्वालीफाई नहीं किया। कुराकाओ ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों में भी सही योजना, ट्रेनिंग और टीम वर्क से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। भारतीय फुटबॉल को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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