स्टेशन के प्लेटफॉर्म में बैटरी गाड़ियों के खिलाफ 105 कुली और उनका परिवार कर रहे आंदोलन

Coolie Protest

रायपुर। ‘सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं, लोग आते हैं लोग जाते हैं, हम यहां पे खड़े रह जाते हैं।’

1983 में आई फिल्म कुली आपको याद होगी। अमिताभ बच्चन ने कुली का किरदार निभाया था। यह गाना उसी फिल्म का है। इस साल भी कुली टाइटल से एक और तमिल फिल्म आई, इसमें रजनी कांत एक्शन में नजर आए। कहानी भी कुली यूनियन नेता के इर्द गिर्द घूमती है। रजनी कांत के इस फिल्म में कुली को पॉवर फुल दिखाया गया है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

दरअसल, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेलवे स्टेशन में यात्रियों को सुविधा देने के लिए 4 बैटरी गाड़ी चलाने का फैसला किया है। सुविधा भी ऐसी कि स्टेशन में एक शख्स को 50 रुपए देने होंगे और उन्हें एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक बैटरी गाड़ी से ले जाया जाएगा। अगर उनके साथ लगेज है तो एक लगेज का 30 रुपए देना होगा।

रेलवे प्रशासन के इस फैसले से रायपुर रेलवे स्टेशन में काम कर रहे 105 कुली और उनका परिवार बड़ी परेशानी में डूबा हुआ है।

इन 105 कुलियों में 8 महिलाएं हैं। रेलवे प्रशासन के बैटरी गाड़ी चलाने के फैसले ने इन 105 कुलियों के परिवार को संकट में डाल दिया है। रेलवे प्रशासन के इस एक फैसले के खिलाफ कुली और उनका पूरा परिवार स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 में पिछले 4 दिनों से धरने पर बैठा है। कुली और उनका परिवार स्टेशन में ही खाना भी खा रहे हैं और रात में भी वहीं रुक रहे हैं।

रेलवे प्रशासन के इस एक फैसले से इन 105 कुलियों के काम छीनने का डर है।

रायपुर रेलवे मंडल स्टेशन में 4 बैटरी वैन लाने की तैयारी कर रहा है। इसमें यात्रियों के साथ-साथ सामान भी रखने की व्यवस्था होगी।

छत्तीसगढ़ रेलवे कुली संघ के अध्यक्ष थानेश्वर साहू कहते हैं कि 80 फीसदी हमारे काम तो वैसे भी छिन गए हैं। एक्सलेटर, लिफ्ट, चक्के वाली ट्रॉली बैग ने उनके काम छीन लिए हैं। ऐसे में अगर सामान लाने ले जाने के लिए बैटरी गाड़ी चलाई जाती है तो उसका असर कुलियों की रोजी रोटी पर पड़ेगा।

संघ के सचिव कुलेश्वर साहू का कहना है कि उन्हें स्टेशन में किसी भी तरह के डेवलपमेंट और आधुनिक सुविधाओं से आपत्ति नहीं है। उनकी प्रशासन से सिर्फ यह मांग है कि उनकी रोजी रोटी का इंतेजाम रेलवे प्रशासन कर दे।

आपको बता दें कि रायपुर रेलवे स्टेशन में पहले से ही समाज सेवी संस्थाओं की तरफ से 2 बैटरी गाड़ी उपलब्ध कराई गई है, जो बुजुर्गों और विकलांगों को नि:शुल्क सेवा देती है। लेकिन, अब इस तरह की बैटरी गाड़ियों का कर्मशियली इस्तेमाल स्टेशन में किया जाएगा।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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