रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव (Nakti) में विधायक कॉलोनी के लिए हुई बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब विधायक कॉलोनी बदलने की मांग उठने लगी है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव राजेश तिवारी द्वारा पार्टी विधायकों से विधायक कॉलोनी के लिए प्लॉट नहीं लेने की अपील किए जाने के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस विधायक जनकराम ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर विधायक कॉलोनी के लिए नकटी की जमीन बदलने की मांग कर दी है।

बिंद्रानवागढ़ विधायक जनकराम ध्रुव ने 30 जून को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि शासन द्वारा विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत नकटी की भूमि का चयन किया गया है, लेकिन इसका स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि लगातार विरोध कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा लोगों को उनकी जमीन और मकानों से बेदखल करना उचित नहीं है।
पत्र में विधायक ने लिखा है कि ‘सैकड़ों ग्रामीणों का आशियाना उजाड़कर बनी आवासीय कॉलोनी में रहना मैं उचित नहीं समझता।’ उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जनहित, प्रशासनिक सुविधा और विधायकों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए नकटी के बजाय नया रायपुर में किसी अन्य उपयुक्त और केंद्रीय स्थान पर विधायक कॉलोनी के लिए भूमि आवंटित की जाए।

29 जून को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव राजेश तिवारी ने पार्टी के सभी विधायकों को पत्र लिखकर अपील की थी कि वे नकटी में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए प्लॉट स्वीकार न करें। उन्होंने कहा था कि जिन परिवारों को हटाकर कॉलोनी बनाई जा रही है, उनके अधिकारों और मानवीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गौरतलब है कि नकटी गांव का मामला पिछले एक साल से लगातार चर्चा में है। इस मुद्दे को ‘द लेंस’ लगातार प्रमुखता से उठाता रहा है। पिछले वर्ष भी ग्रामीणों के विरोध के बाद बेदखली की कार्रवाई टाल दी गई थी, लेकिन इस बार प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 85 मकानों को ध्वस्त कर दिया।
29 जून को जब प्रशासन ने 85 मकानों को तोड़ा था तो किसी भी कांग्रेसी ने इसका विरोध नहीं किया था। सिर्फ भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल ने सरकार को इस फैसले का विरोध भी किया था। नकटी में तोड़फोड़ के एक दिन बाद कांग्रेस का एक दल नकटी गांव पहुंचा था।
अब कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर खुलकर आवाज उठने लगी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विधायक कॉलोनी के लिए स्थान बदलने की मांग पर क्या फैसला लेती है और नकटी विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है।











