नई दिल्ली। ऑनलाइन फ्राड का शिकार लोगों के लिए खुशखबरी है। आरबीआई कम मूल्य वाली बैंकिंग धोखाधड़ी और डिजिटल लेनदेन में होने वाले नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये (276 डॉलर) तक मुआवजा देने का ढांचा प्रस्तावित करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति के संबोधन में यह बात कही।
समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार भारत का केंद्रीय बैंक उधार देने वालों द्वारा मिस-सेलिंग, ऋण वसूली, तथाकथित रिकवरी एजेंटों के उपयोग और अनधिकृत बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करने पर मसौदा दिशानिर्देश जारी करेगा, मल्होत्रा ने कहा।
गवर्नर ने कहा कि मुआवजा खोई गई राशि का 85 फीसदी या 25,000 रुपये, जो भी कम हो, तक देय होगा। यह एक बार की राहत अनजाने धोखाधड़ी के मामलों पर लागू होगी, चाहे ग्राहक खुद किसी तरह से दोषी रहा हो या नहीं।
उन्होंने कहा, ‘जब तक ग्राहक धोखाधड़ी का शिकार होते हैं चाहे अपनी मर्जी से या किसी और की मर्जी से, कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा।हम उन्हें मुआवजा देंगे जब तक कि यह अनजाना न हो।’
मल्होत्रा ने बताया कि बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी का लगभग 65% हिस्सा 50,000 रुपये से कम के नुकसान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह राशि बैंकों के लिए छोटी है, लेकिन छोटे ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है, और यह तत्काल राहत और सुकून देने का तरीका है।
RBI के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. ने संवाददाताओं से कहा कि मुआवजा जमा शिक्षा और जागरूकता फंड से दिया जा सकता है, हालांकि विस्तृत नियम अभी जारी नहीं किए गए हैं।
इसके अलावा, RBI डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ‘लैग्ड क्रेडिट्स’ और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण जैसे उपायों पर एक चर्चा पत्र जारी करेगा।











