नई दिल्ली। चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसने पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत चार दिन के युद्ध के दौरान पाकिस्तान को ऑन-साइट तकनीकी सहायता प्रदान की थी।युद्ध के दौरान, एक चीनी निर्मित फाइटर जेट ने भारत के फ्रेंच-निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को कम से कम एक बार गिराया था
फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार गुरुवार को चीन के राज्य प्रसारक CCTV ने एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग का इंटरव्यू प्रसारित किया। झांग ने युद्ध के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी।
पाकिस्तान की एयर फोर्स चीनी-निर्मित J-10CE जेट्स का संचालन करती है, जो AVIC की सहायक कंपनी द्वारा बनाए जाते हैं। इनमें से एक जेट ने युद्ध में भारतीय राफेल को गिराने में भूमिका निभाई।यह पहली बार था जब चीनी मॉडल ने दुश्मन के विमान को गिराया और राफेल को भी पहली बार गिराया गया।
झांग हेंग ने CCTV को बताया कि सपोर्ट बेस पर हम अक्सर फाइटर जेट्स के उड़ान भरने की गर्जना और एयर-रेड सायरनों की आवाज सुनते थे। मई के महीने में दोपहर तक तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता था। यह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कठिन था। उनकी टीम को जो प्रेरित करता था, वह था ऑन-साइट सपोर्ट में और बेहतर प्रदर्शन करने की इच्छा” और यह सुनिश्चित करना कि उनका उपकरण पूरी लड़ाकू क्षमता से काम करे।
झांग ने कहा कि यह सिर्फ J-10CE की मान्यता नहीं थी, बल्कि दिन-रात साथ काम करके बने गहरे बंधन का प्रमाण भी था। एक अन्य इंजीनियर शू दा (Xu Da) ने J-10CE को ‘बच्चे’ की तरह बताया। उसने कहा कि हमने इसे पाला, देखभाल की और यूजर को सौंपा। अब यह बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा था।
उन्होंने कहा कि J-10CE के शानदार परिणाम उन्हें आश्चर्यजनक नहीं लगे कि यह अपरिहार्य था। विमान को बस सही मौका चाहिए था।
यह इंजीनियरों के बयान पहली पुष्टि हैं कि चीनी कर्मियों ने पिछले साल कश्मीर विवाद पर भारत-पाकिस्तान संघर्ष में भूमिका निभाई थी।J-10CE J-10C का एक्सपोर्ट वेरिएंट है, जिसमें AESA रडार और उन्नत चीनी एयर-टू-एयर मिसाइलें शामिल हैं। पाकिस्तान ने 2020 में 36 J-10CE और 250 PL-15 मिसाइलें ऑर्डर की थीं।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2021-2025 के बीच पाकिस्तान के हथियार आयात का 80 चीन से आया। पाकिस्तान एयर फोर्स JF-17 जेट (चीन के साथ संयुक्त रूप से विकसित) को भी मुख्य रूप से इस्तेमाल करती है।
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