रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों को राजनीतिक दलों और संगठनों की गतिविधियों से दूर रखने संबंधी आदेश (Political ban on employees) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 अप्रैल को जारी किया गया यह आदेश अगले ही दिन 22 अप्रैल को वापस ले लिया गया, जिसके बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।

21 अप्रैल के आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल या संगठन की गतिविधियों में भाग नहीं ले सकेंगे और उन्हें सेवा आचरण नियमों के तहत निष्पक्ष रहना होगा। लेकिन 24 घंटे के भीतर ही सरकार ने इस आदेश को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के अध्यक्ष कमल वर्मा ने कहा कि इस आदेश का विरोध सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और उप सचिव अंशिका पांडेय से व्हाट्सएप के माध्यम से किया था। भविष्य में इस आदेश का विरोध हर स्तर पर करने का लेख किया था। शासन को उक्त आदेश को वापस लेना पड़ा।
हालांकि इस फैसले पर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि यह आदेश आरएसएस के दबाव में वापस लिया गया। कांग्रेस का कहना है कि यदि यह निर्देश लागू रहता तो कर्मचारियों की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी पर रोक लग जाती, जिससे कई प्रभावशाली समूहों पर असर पड़ता।

दीपक बैज ने कहा कि सरकार का बेहद आश्चर्यचकित करने वाला आदेश आया है, पहले सरकार ने 21 अप्रैल को आदेश निकाला था कि शासकीय कर्मचारियों को किसी भी राजनैतिक दल एवं सामाजिक संगठन में भाग लेने पर प्रतिबंध है। लेकिन उसके बाद आदेश 22 अप्रैल को आदेश आया कि 21 अप्रैल का आदेश था उसमें आगामी आदेश तक रोक लगाया जाता है।
दीपक बैज ने आगे कहा कि नये आदेश के बाद आज की तारीख में छत्तीसगढ़ में कोई भी कर्मचारी राजनैतिक दल का सदस्य बन सकता है, सामाजिक संगठन का सदस्य बन सकता है। सरकार का आदेश अपने ही नियम को धता बताने वाला है। इस आदेश से पता चलता है कि या तो सरकार अफीम खाकर चल रही या फिर अनाड़ी लोगों के दबाव में चल रही है।
बैज ने सरकार के इस यू-टर्न को नीतिगत अस्थिरता बताते हुए सवाल उठाया है कि जब सेवा नियमों में पहले से ही प्रावधान मौजूद हैं, तो अलग से आदेश जारी कर उसे तुरंत वापस लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
वहीं, सरकार की ओर से आदेश वापस लेने को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है, जिससे यह मामला अब पूरी तरह राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।
यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर 3 महीने की रोक, जनगणना और सुशासन तिहार के चलते फैसला









